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Rigveda Mandal 2 / Sukta 32 / Mantra 5

43 Sukta
8 Mantra
2/32/5
Devata- राका Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यास्ते॑ राके सुम॒तयः॑ सु॒पेश॑सो॒ याभि॒र्ददा॑सि दा॒शुषे॒ वसू॑नि। ताभि॑र्नो अ॒द्य सु॒मना॑ उ॒पाग॑हि सहस्रपो॒षं सु॑भगे॒ ररा॑णा॥

याः । ते॒ । रा॒के॒ । सु॒ऽम॒तयः॑ । सु॒ऽपेश॑सः । याभिः॑ । ददा॑सि । दा॒शुषे॑ । वसू॑नि । ताभिः॑ । नः॒ । अ॒द्य । सु॒ऽमनाः॑ । उ॒प॒ऽआग॑हि । स॒ह॒स्र॒ऽपो॒षम् । सु॒ऽभ॒गे॒ । ररा॑णा ॥

Mantra without Swara
यास्ते राके सुमतयः सुपेशसो याभिर्ददासि दाशुषे वसूनि। ताभिर्नो अद्य सुमना उपागहि सहस्रपोषं सुभगे रराणा॥

याः। ते। राके। सुऽमतयः। सुऽपेशसः। याभिः। ददासि। दाशुषे। वसूनि। ताभिः। नः। अद्य। सुऽमनाः। उपऽआगहि। सहस्रऽपोषम्। सुऽभगे। रराणा॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 15 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (राके) रात्रि के समान सुख देनेवाली जो (ते) आपकी (सुपेशसः) सुन्दर रूपवाली दीप्ति और (सुमतयः) उत्तम बुद्धि हैं जिनसे आप (दाशुषे) देनेवाले पति के लिये (वसूनि) धनों को (ददासि) देती हो उनसे (नः) हमलोगों को (अद्य) आज (सुमनाः) प्रसन्नचित्त हुई (उपागहि) समीप आओ, हे (सुभगे) सौभाग्ययुक्त स्त्री (रराणा) उत्तम देनेवाली होती हुई हम लोगों के लिये (सहस्रपोषम्) असङ्ख्य प्रकार से पुष्टि को देओ ॥५॥
Essence
यदि सुलक्षणा विदुषी स्त्री श्रेष्ठ विद्वान् जन की पत्नी हो तो धन की और सुख की बहुत प्रकार प्राप्ति हो ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।