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Rigveda Mandal 2 / Sukta 3 / Mantra 8

43 Sukta
11 Mantra
2/3/8
Devata- अग्निः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सर॑स्वती सा॒धय॑न्ती॒ धियं॑ न॒ इळा॑ दे॒वी भार॑ती वि॒श्वतू॑र्तिः। ति॒स्रो दे॒वीः स्व॒धया॑ ब॒र्हिरेदमच्छि॑द्रं पान्तु शर॒णं नि॒षद्य॑॥

सर॑स्वती । सा॒धय॑न्ती । धिय॑म् । नः॒ । इळा॑ । दे॒वी । भार॑ती । वि॒श्वऽतू॑र्तिः । ति॒स्रः । दे॒वीः । स्व॒धया॑ । ब॒र्हिः । आ । इ॒दम् । अच्छि॑द्रम् । पा॒न्तु॒ । श॒र॒णम् । नि॒ऽसद्य॑ ॥

Mantra without Swara
सरस्वती साधयन्ती धियं न इळा देवी भारती विश्वतूर्तिः। तिस्रो देवीः स्वधया बर्हिरेदमच्छिद्रं पान्तु शरणं निषद्य॥

सरस्वती। साधयन्ती। धियम्। नः। इळा। देवी। भारती। विश्वऽतूर्तिः। तिस्रः। देवीः। स्वधया। बर्हिः। आ। इदम्। अच्छिद्रम्। पान्तु। शरणम्। निऽसद्य॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 23 Mantra » 3

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Meaning
जो (साधयन्ती) विद्या और उत्तम शिक्षा से औरों को विद्वान् कराती (सरस्वती) प्रशस्त विज्ञान करानेवाली वाणी सदृश स्त्री (देवी) देदीप्यमान (इळा) स्तुति करने योग्य (विश्वतूर्त्तिः) समस्त संसार को शीघ्रता करानेवाली (भारती) और शुभ गुणों को धारण करनेवाली (तिस्रः) तीन (देवीः) मनोहर देवी (इदम्) इस (अच्छिद्रम्) छिद्ररहित (बर्हिः) अन्तरिक्ष को (निषद्य) निरन्तर प्राप्त हो के (स्वधया) अन्न से (नः) हमारी (धियम्) बुद्धि वा कर्म को (आपान्तु) अच्छे प्रकार पालें उनका (शरणम्) आश्रय हम लोगों को करना चाहिये ॥८॥
Essence
एक माता दूसरी पढ़ानेवाली और तीसरी उपदेश करनेवाली स्त्री कन्याओं को सदा समीप में सेवनी चाहिये, जिससे बुद्धि और विद्या नित्य बढ़े ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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