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Rigveda Mandal 2 / Sukta 3 / Mantra 5

43 Sukta
11 Mantra
2/3/5
Devata- अग्निः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वि श्र॑यन्तामुर्वि॒या हू॒यमा॑ना॒ द्वारो॑ दे॒वीः सु॑प्राय॒णा नमो॑भिः। व्यच॑स्वती॒र्वि प्र॑थन्तामजु॒र्या वर्णं॑ पुना॒ना य॒शसं॑ सु॒वीर॑म्॥

वि । श्र॑यन्ताम् । उ॒र्वि॒या । हू॒यमा॑नाः । द्वारः॑ । दे॒वीः । सु॒प्र॒ऽअ॒य॒नाः । नमः॑ऽभिः । व्यच॑स्वतीः । वि । प्र॒थ॒न्ता॒म् । अ॒जु॒र्याः । वर्ण॑म् । पु॒ना॒नाः । य॒शस॑म् । सु॒ऽवीर॑म् ॥

Mantra without Swara
वि श्रयन्तामुर्विया हूयमाना द्वारो देवीः सुप्रायणा नमोभिः। व्यचस्वतीर्वि प्रथन्तामजुर्या वर्णं पुनाना यशसं सुवीरम्॥

वि। श्रयन्ताम्। उर्विया। हूयमानाः। द्वारः। देवीः। सुप्रऽअयनाः। नमःऽभिः। व्यचस्वतीः। वि। प्रथन्ताम्। अजुर्याः। वर्णम्। पुनानाः। यशसम्। सुऽवीरम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 22 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे पुरुषो ! आप (नमोभिः) अन्नादिकों वा (उर्विया) पृथिवी के साथ वर्त्तमान (द्वारः) द्वारों के समान शोभावती हुईं और (हूयमानाः) ग्रहण की हुईं (सुप्रायणाः) जिनकी सुन्दर चाल (अजुर्याः) ज्वररहित मनुष्यों में उत्तमता को प्राप्त (सुवीरम्) उत्तम वीरों से युक्त (यशसम्) यश और (वर्णम्) अपने रूप को (पुनानाः) पवित्र करती हुईं (व्यचस्वतीः) समस्त गुणों में व्याप्ति रखनेवाली (देवीः) देदीप्यमान अर्थात् चमकती-दमकती हुई स्त्रियों को (विश्रयन्ताम्) विशेषता से आश्रय करो और उनके साथ शास्त्र वा सुखों को (विप्रथन्ताम्) विशेषता को कहो-सुनो ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे कारुकों के बनाये हुए घरों में सुन्दर शोभायुक्त बनाये हुए द्वारे होवें, वैसे विदुषी धर्म्मपरायणा पतिव्रता स्त्रियाँ कीर्त्तिमती और उत्तम सन्तानों की उत्पन्न करनेवाली होती हैं ॥५॥
Subject
अब स्त्री-पुरुषों के आचरण को कहते हैं।