Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 3 / Mantra 2

43 Sukta
11 Mantra
2/3/2
Devata- अग्निः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नरा॒शंसः॒ प्रति॒ धामा॑न्य॒ञ्जन् ति॒स्रो दिवः॒ प्रति॑ म॒ह्ना स्व॒र्चिः। घृ॒त॒प्रुषा॒ मन॑सा ह॒व्यमु॒न्दन्मू॒र्धन्य॒ज्ञस्य॒ सम॑नक्तु दे॒वान्॥

नरा॒शंसः॑ । प्रति॑ । धामा॑नि । अ॒ञ्जन् । ति॒स्रः । दिवः॑ । प्रति॑ । म॒ह्ना । सु॒ऽअ॒र्चिः । घृ॒त॒ऽप्रुषा॑ । मन॑सा । ह॒व्यम् । उ॒न्दन् । मू॒र्धन् । य॒ज्ञस्य॑ । सम् । अ॒न॒क्तु॒ । दे॒वान् ॥

Mantra without Swara
नराशंसः प्रति धामान्यञ्जन् तिस्रो दिवः प्रति मह्ना स्वर्चिः। घृतप्रुषा मनसा हव्यमुन्दन्मूर्धन्यज्ञस्य समनक्तु देवान्॥

नराशंसः। प्रति। धामानि। अञ्जन्। तिस्रः। दिवः। प्रति। मह्ना। सुऽअर्चिः। घृतऽप्रुषा। मनसा। हव्यम्। उन्दन्। मूर्धन्। यज्ञस्य। सम्। अनक्तु। देवान्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 22 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे विद्वान् ! आप जैसे (नराशंसः) मनुष्यों को प्रशंसा करने योग्य (धामानि) स्थानों को (प्रत्यञ्जन्) प्रकट करता हुआ (स्वर्चिः) प्रशंसित दीप्तिवाला अग्नि (मह्ना) अपने बड़प्पन से (तिस्रः) गार्हपत्य आहवनीय दाक्षिणात्य से तीन (दिवः) दीप्तियों को तथा (हव्यम्) भक्षण करने योग्य पदार्थ (प्रत्युन्दन्) आर्द्रपन से प्रतिकूल करता हुआ (यज्ञस्य) यज्ञ के (मूर्द्धन्) उत्तम अङ्ग में (घृतप्रुषा) तेज से परिपूर्ण प्रचण्ड वा (मनसा) अपने गुणों का जो विज्ञान उससे (देवान्) दिव्य गुण वा विद्वानों को अच्छे प्रकार प्रकट है वैसे (समनक्तु) प्रकट कीजिये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे अग्नि बिजुली प्रसिद्ध और सूर्य रूप से सब व्यवहारों को पूर्ण करता है, वैसे विद्वान् जन विद्या धर्म और सुन्दर शील आदि की प्राप्ति से समस्त आशा जो मनुष्यों की उनको पूर्ण करें ॥२॥
Subject
अब अग्नि के दृष्टान्त से विद्वानों के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.