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Rigveda Mandal 2 / Sukta 28 / Mantra 9

43 Sukta
11 Mantra
2/28/9
Devata- वरुणः Rishi- कूर्मो गार्त्समदो गृत्समदो वा Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
परा॑ ऋ॒णा सा॑वी॒रध॒ मत्कृ॑तानि॒ माहं रा॑जन्न॒न्यकृ॑तेन भोजम्। अव्यु॑ष्टा॒ इन्नु भूय॑सीरु॒षास॒ आ नो॑ जी॒वान्व॑रुण॒ तासु॑ शाधि॥

परा॑ । ऋ॒णा । सा॒वीः॒ । अध॑ । मत्ऽकृ॑तानि । मा । अ॒हम् । रा॒ज॒न् । अ॒न्यऽकृ॑तेन । भो॒ज॒म् । अवि॑ऽउष्टाः । इत् । नु । भूय॑सीः । उ॒षसः॑ । आ । नः॒ । जी॒वान् । व॒रु॒ण॒ । तासु॑ । शा॒धि॒ ॥

Mantra without Swara
परा ऋणा सावीरध मत्कृतानि माहं राजन्नन्यकृतेन भोजम्। अव्युष्टा इन्नु भूयसीरुषास आ नो जीवान्वरुण तासु शाधि॥

परा। ऋणा। सावीः। अध। मत्ऽकृतानि। मा। अहम्। राजन्। अन्यऽकृतेन। भोजम्। अविऽउष्टाः। इत्। नु। भूयसीः। उषसः। आ। नः। जीवान्। वरुण। तासु। शाधि॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 10 Mantra » 4

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Meaning
हे (वरुण) सर्वोत्कृष्ट (राजन्) सर्वत्र प्रकाशमान जगदीश्वर आप (मत्कृतानि) मेरे लिये (परा) उत्तम (णा) णों को (सावीः) सिद्ध चुकते कीजिये जिससे (अहम्) मैं (अन्यकृतेन) अन्य ने किये से (मा,भोजम्) न भोगूँ (अध) और अनन्तर आप जो (भूयसीः) बहुत (उषासः) दिन (अव्युष्टाः) रक्षादि में निवास को प्राप्त हैं (तासु) उन दिनों में (इत्) ही (नः) हम (जीवान्) जीवों को (आ,शाधि) अच्छे प्रकार शिक्षित कीजिये ॥९॥
Essence
जैसे ईश्वर जिसने जैसा कर्म किया है, उसको वैसा फल देता है, वेद द्वारा सबको शिक्षा करता, वैसे ही विद्वानों को अनुष्ठान करना चाहिये ॥९॥
Subject
फिर विद्वान् लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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