Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 27 / Mantra 6

43 Sukta
17 Mantra
2/27/6
Devata- आदित्याः Rishi- कूर्मो गार्त्समदो गृत्समदो वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सु॒गो हि वो॑ अर्यमन्मित्र॒ पन्था॑ अनृक्ष॒रो व॑रुण सा॒धुरस्ति॑। तेना॑दित्या॒ अधि॑ वोचता नो॒ यच्छ॑ता नो दुष्परि॒हन्तु॒ शर्म॑॥

सु॒ऽगः । हि । वः॒ । अ॒र्य॒म॒न् । मि॒त्र॒ । पन्थाः॑ । अ॒नृ॒क्ष॒रः । व॒रु॒ण॒ । सा॒धुः । अस्ति॑ । तेन॑ । आ॒दि॒त्याः॒ । अधि॑ । वो॒च॒त॒ । नः॒ । यच्छ॑त । नः॒ । दुः॒ऽप॒रि॒हन्तु॑ । शर्म॑ ॥

Mantra without Swara
सुगो हि वो अर्यमन्मित्र पन्था अनृक्षरो वरुण साधुरस्ति। तेनादित्या अधि वोचता नो यच्छता नो दुष्परिहन्तु शर्म॥

सुऽगः। हि। वः। अर्यमन्। मित्र। पन्थाः। अनृक्षरः। वरुण। साधुः। अस्ति। तेन। आदित्याः। अधि। वोचत। नः। यच्छत। नः। दुःऽपरिहन्तु। शर्म॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 7 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (आदित्या: विद्वान् लोगो हे (अर्यमन्) श्रेष्ठ सत्कार युक्त हे (मित्र) मित्र हे (वरुण) प्रतिष्ठित सज्जन पुरुष जो (वः) तुम लोगों का (अनृक्षरः) कण्टकादि रहित (सुगः) जिसमें निर्विघ्न चल सकें (साधुः) जिसमें धर्म को सिद्ध करते ऐसा (पन्थाः) मार्ग (अस्ति) है (तेन, हि) उसी मार्ग से चलने के लिये (नः) हमको (अधि,वोचत) अधिक कर उपदेश करो और जो यह (दुष्परिहन्तु) बड़ी कठिनता से टूटे-फूटे ऐसे विद्याभ्यासादि के लिये बना हुआ (शर्म) घर है वह (नः) हमारे लिये (यच्छत) देओ ॥६॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि धर्मात्मा विद्वानों के स्वभाव को ग्रहण कर वेदोक्त सत्य मार्ग में चलें, जिससे सत्यशास्त्र के पढ़ने-पढ़ाने की वृद्धि होवे, वही कर्म सदा सेवने योग्य है ॥६॥
Subject
फिर विद्वानों के संग में प्रीति रखनेवाले मनुष्य लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।