Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 27 / Mantra 15

43 Sukta
17 Mantra
2/27/15
Devata- आदित्याः Rishi- कूर्मो गार्त्समदो गृत्समदो वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒भे अ॑स्मै पीपयतः समी॒ची दि॒वो वृ॒ष्टिं सु॒भगो॒ नाम॒ पुष्य॑न्। उ॒भा क्षया॑वा॒जय॑न्याति पृ॒त्सूभावर्धौ॑ भवतः सा॒धू अ॑स्मै॥

उ॒भे इति॑ । अ॒स्मै॒ । पी॒प॒य॒तः॒ । स॒मी॒ची इति॑ स॒म्ऽई॒ची । दि॒वः । वृ॒ष्टिम् । सु॒ऽभगः॑ । नाम॑ । पुष्य॑न् । उ॒भा । क्षयौ॑ । आ॒ऽजय॑न् । या॒ति॒ । पृ॒त्ऽसु । उ॒भौ । अर्धौ॑ । भ॒व॒तः॒ । सा॒धू इति॑ । अ॒स्मै॒ ॥

Mantra without Swara
उभे अस्मै पीपयतः समीची दिवो वृष्टिं सुभगो नाम पुष्यन्। उभा क्षयावाजयन्याति पृत्सूभावर्धौ भवतः साधू अस्मै॥

उभे इति। अस्मै। पीपयतः। समीची इति सम्ऽईची। दिवः। वृष्टिम्। सुऽभगः। नाम। पुष्यन्। उभा। क्षयौ। आऽजयन्। याति। पृत्ऽसु। उभौ। अर्धौ। भवतः। साधू इति। अस्मै॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 8 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे (समीची) जो दीप्ति को सम्यक् प्राप्त होती वह स्त्री और (सुभगः) शोभन ऐश्वर्यवाला राजा (दिवः) दिव्य शुद्ध आकाश से (वृष्टिम्) यज्ञादि द्वारा वर्षा कराते (नाम) जल को (पुष्यन्) पुष्ट करते हुए वैसे (अस्मै) इस राज्य के लिये (उभे) दोनों राजा-रानी (पीपयतः) उन्नति करते हैं (उभा) दोनों (क्षयौ) निवास करते हुए (अर्द्धौ) राज्य को समृद्ध करनेवाले (अस्मै) इस राज्य के लिये (साधू) शुभ चरित्र में स्थित (भवतः) होवें वे (पृत्सु) सङ्ग्रामों में विजय करनेवाले होवें, उन दोनों का सङ्गी (आ,जयन्) विजय करता हुआ सुखको (याति) प्राप्त होता है ॥१५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो स्त्री-पुरुष सूर्यदीप्ति जगत् को जैसे, वैसे सब राज्य को पुष्ट करें और सुन्दर चरित्रोंवाले हों, वे न्यायाधीशपन को प्राप्त होते हैं ॥१५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।