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Rigveda Mandal 2 / Sukta 24 / Mantra 15

43 Sukta
16 Mantra
2/24/15
Devata- ब्रह्मणस्पतिः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ब्रह्म॑णस्पते सु॒यम॑स्य वि॒श्वहा॑ रा॒यः स्या॑म र॒थ्यो॒३॒॑ वय॑स्वतः। वी॒रेषु॑ वी॒राँ उप॑ पृङ्धि न॒स्त्वं यदीशा॑नो॒ ब्रह्म॑णा॒ वेषि॑ मे॒ हव॑म्॥

ब्रह्म॑णः । प॒ते॒ । सु॒ऽयम॑स्य । वि॒श्वहा॑ । रा॒यः । स्या॒म॒ । र॒थ्यः॑ । वय॑स्वतः । वी॒रेषु॑ । वी॒रान् । उप॑ । पृ॒ङ्धि॒ । नः॒ । त्वम् । यत् । ईशा॑नः । ब्रह्म॑णा । वेषि॑ । मे॒ । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
ब्रह्मणस्पते सुयमस्य विश्वहा रायः स्याम रथ्यो३ वयस्वतः। वीरेषु वीराँ उप पृङ्धि नस्त्वं यदीशानो ब्रह्मणा वेषि मे हवम्॥

ब्रह्मणः। पते। सुऽयमस्य। विश्वहा। रायः। स्याम। रथ्यः। वयस्वतः। वीरेषु। वीरान्। उप। पृङ्धि। नः। त्वम्। यत्। ईशानः। ब्रह्मणा। वेषि। मे। हवम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 3 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ब्रह्मणः) धन के (पते) रक्षक (रथ्यः) रथक्रिया में प्रवीण (विश्वहा) सबको जानने वा प्राप्त होनेवाले (त्वम्) आप (ब्रह्मणा) वेद से (मे) मेरे (यत्) जिस (हवम्) आह्वान बुलाने को (वेषि) प्राप्त होते हो उस आह्वान से (नः) हमको (सुयमस्य) सुन्दर संयम हों जिससे उस और (वयस्वतः) जिसके होने में अच्छा जीवन व्यतीत हो उस (रायः) धनके रक्षक (वीरेषु) वीर सिपाहियों में हम (वीरान्) वीर लोगों से (उप,पृङ्धि) समीप सम्बन्ध कीजिये जिससे हम लोग अभीष्ट कार्य सिद्ध करनेवाले (स्याम) हों ॥१५॥
Essence
जो लोग सुन्दर संयमवाले हों, वे बहुत काल जीवें, जो ब्रह्मचर्य्य का पालन करें, वे आत्मा और शरीर से अच्छे वीर होते हैं ॥१५॥
Subject
फिर मनुष्य क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।