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Rigveda Mandal 2 / Sukta 23 / Mantra 7

43 Sukta
19 Mantra
2/23/7
Devata- बृहस्पतिः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
उ॒त वा॒ यो नो॑ म॒र्चया॒दना॑गसोऽराती॒वा मर्तः॑ सानु॒को वृकः॑। बृह॑स्पते॒ अप॒ तं व॑र्तया प॒थः सु॒गं नो॑ अ॒स्यै दे॒ववी॑तये कृधि॥

उ॒त । वा॒ । यः । नः॒ । म॒र्चया॑त् । अना॑गसः । अ॒रा॒ती॒ऽवा । मर्तः॑ । सा॒नु॒कः । वृकः॑ । बृह॑स्पते । अप॑ । तम् । व॒र्त॒य॒ । प॒थः । सु॒ऽगम् । नः॒ । अ॒स्यै । दे॒वऽवी॑तये । कृ॒धि॒ ॥

Mantra without Swara
उत वा यो नो मर्चयादनागसोऽरातीवा मर्तः सानुको वृकः। बृहस्पते अप तं वर्तया पथः सुगं नो अस्यै देववीतये कृधि॥

उत। वा। यः। नः। मर्चयात्। अनागसः। अरातीऽवा। मर्तः। सानुकः। वृकः। बृहस्पते। अप। तम्। वर्तय। पथः। सुऽगम्। नः। अस्यै। देवऽवीतये। कृधि॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (बृहस्पते) बड़े पाप वियोग करनेवाले (यः) जो (नः) हम लोगों को (अनागसः) अनपराधी (पथः) मार्ग से (मर्चयात्) जो सुमार्गयान उसमें प्राप्त करें (उतवा) अथवा जो (अरातीवा) शत्रुओं का अच्छे प्रकार सेवन करता (सानुकः) और अनुगामी के साथ वर्त्तमान (वृकः) चोर (मर्त्तः) मनुष्य हो (तम्) उसको उस मार्ग से (अप,वर्त्तय) दूर करो (नः) हमारी (अस्यै) इस (देववीतये) दिव्य गुणों में व्याप्ति के लिये (सुगम्) सुगम मार्ग (कृधि) करो ॥७॥
Essence
हे परमेश्वर! जो हम लोगों को सुमार्ग से सुख को प्राप्त कराते, उनको पहुँचाइये और जो दुष्पथ को पहुँचाते हैं, उनको अलग कीजिये तथा कृपा से शुद्ध सरल धर्मयुक्त मार्ग को प्राप्त कीजिये ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।