Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 21 / Mantra 4

43 Sukta
6 Mantra
2/21/4
Devata- इन्द्र: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
अ॒ना॒नु॒दो वृ॑ष॒भो दोध॑तो व॒धो ग॑म्भी॒र ऋ॒ष्वो अस॑मष्टकाव्यः। र॒ध्र॒चो॒दः श्नथ॑नो वीळि॒तस्पृ॒थुरिन्द्रः॑ सुय॒ज्ञ उ॒षसः॒ स्व॑र्जनत्॥

अ॒न॒नु॒ऽदः । वृ॒ष॒भः । दोध॑तः । व॒धः । ग॒म्भी॒रः । ऋ॒ष्वः । अस॑मष्टऽकाव्यः । र॒ध्र॒ऽचो॒दः । श्नथ॑नः । वी॒ळि॒तः । पृ॒थुः । इन्द्रः॑ । सु॒ऽय॒ज्ञः । उ॒षसः॑ । स्वः॑ । ज॒न॒त् ॥

Mantra without Swara
अनानुदो वृषभो दोधतो वधो गम्भीर ऋष्वो असमष्टकाव्यः। रध्रचोदः श्नथनो वीळितस्पृथुरिन्द्रः सुयज्ञ उषसः स्वर्जनत्॥

अननुऽदः। वृषभः। दोधतः। वधः। गम्भीरः। ऋष्वः। असमष्टऽकाव्यः। रध्रऽचोदः। श्नथनः। वीळितः। पृथुः। इन्द्रः। सुऽयज्ञः। उषसः। स्वः। जनत्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 27 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो जैसे (उषसः) प्रभात से (स्वर्जनत्) दिन के समान सुख का प्रकाश हो वैसे जो (अनानुदः) नहीं प्रेरित (वृषभः) सर्वोत्तम (गम्भीरः) गम्भीर आशयवाला (ष्वः) ज्ञाता (असमष्टकाव्यः) जिसको अच्छे प्रकार कविताई न व्याप्त हुई न जिसके मन को रमी (रध्रचोदः) जो रुकावटी पदार्थों को प्रेरणा देने और (श्नथनः) दुष्टों की हिंसा करनेवाला (वीळितः) विविध गुणों से स्तुति किया गया (पृथुः) विस्तृत फलयुक्त (सुयज्ञः) सुन्दर-सुन्दर जिसके विद्वानों के सत्कार आदि पदार्थ (इन्द्रः) जो सूर्य के समान अच्छी शोभावाला विद्वान् है जिसने (दोधतः) हिंसक का (वा) (वधः) नाश किया वह सबको सुख देने के योग्य हो ॥४॥
Essence
जो मनुष्य अपने से विविध गुण और कर्मों का आचरण श्रेष्ठों का सत्कार और दुष्टों की हिंसा करते हुए सर्वशास्त्रवेत्ता धर्मात्मा हैं, वे सूर्य के समान प्रकाश करनेवाले हों ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।