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Rigveda Mandal 2 / Sukta 19 / Mantra 7

43 Sukta
9 Mantra
2/19/7
Devata- इन्द्र: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए॒वा त॑ इन्द्रो॒चथ॑महेम श्रव॒स्या न त्मना॑ वा॒जय॑न्तः। अ॒श्याम॒ तत्साप्त॑माशुषा॒णा न॒नमो॒ वध॒रदे॑वस्य पी॒योः॥

ए॒व । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । उ॒चथ॑म् । अ॒हे॒म॒ । श्र॒व॒स्या । न । त्मना॑ । वा॒जय॑न्तः । अ॒श्याम॑ । तत् । साप्त॑म् । आ॒शु॒षा॒णाः । न॒नमः॑ । वधः॑ । अदे॑वस्य । पी॒योः ॥

Mantra without Swara
एवा त इन्द्रोचथमहेम श्रवस्या न त्मना वाजयन्तः। अश्याम तत्साप्तमाशुषाणा ननमो वधरदेवस्य पीयोः॥

एव। ते। इन्द्र। उचथम्। अहेम। श्रवस्या। न। त्मना। वाजयन्तः। अश्याम। तत्। साप्तम्। आशुषाणाः। ननमः। वधः। अदेवस्य। पीयोः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 24 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) विद्वान् (ते) आपके (त्मना) आत्मा से (वाजयन्तः) ज्ञान कराते हुए हम लोग (श्रवस्या) श्रवण करने योग्य पदार्थ के (न) समान (उचथम्) और कहने योग्य प्रस्ताव (एव) ही को (अहेम) व्याप्त हों तथा (आशुषाणाः) शीघ्रता करते हुए हम लोग (तत्) उस (साप्तम्) सात प्रकार के विषय को (अश्याम) व्याप्त हों (अदेवस्य) अविद्वान् (पीयोः) पालना करनेवाले सूर्य को (वधः) वध करनेवाले शस्त्र को व्याप्त हों और परमेश्वर को (ननमः) नमस्कार करें ॥७॥
Essence
जो मनुष्य कहने योग्य को कहें, पाने योग्य को पावें, नमने योग्य को नमें, मारने योग्य को मारें और जानने योग्य को जानें, वे ही आप्त होते हैं ॥७॥
Subject
अब विद्वान् के विषय को इस मन्त्र में कहा है।