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Rigveda Mandal 2 / Sukta 18 / Mantra 5

43 Sukta
9 Mantra
2/18/5
Devata- इन्द्र: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ विं॑श॒त्या त्रिं॒शता॑ याह्य॒र्वाङा च॑त्वारिं॒शता॒ हरि॑भिर्युजा॒नः। आ प॑ञ्चा॒शता॑ सु॒रथे॑भिरि॒न्द्रा ष॒ष्ट्या स॑प्त॒त्या सो॑म॒पेय॑म्॥

आ । विं॒श॒त्या । त्रिं॒शता॑ । या॒हि॒ । अ॒र्वाङ् । आ । च॒त्वा॒रिं॒शता॑ । हरि॑ऽभिः । यु॒जा॒नः । आ । प॒ञ्चा॒शता॑ । सु॒ऽरथे॑भिः । इ॒न्द्र॒ । आ । ष॒ष्ट्या । स॒प्त॒त्या । सो॒म॒ऽपेय॑म् ॥

Mantra without Swara
आ विंशत्या त्रिंशता याह्यर्वाङा चत्वारिंशता हरिभिर्युजानः। आ पञ्चाशता सुरथेभिरिन्द्रा षष्ट्या सप्तत्या सोमपेयम्॥

आ। विंशत्या। त्रिंशता। याहि। अर्वाङ्। आ। चत्वारिंशता। हरिऽभिः। युजानः। आ। पञ्चाशता। सुऽरथेभिः। इन्द्र। आ। षष्ट्या। सप्तत्या। सोमऽपेयम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 21 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) असंख्य ऐश्वर्य देनेवाले (युजानः) युक्त होते हुए आप (विंशत्या) बीस (त्रिंशता) और तीस (हरिभिः) हरनेवाले पदार्थों से चलाये हुए यान से (अर्वाङ्) जो नीचे को जाता उस (सोमपेयम्) सोमादि ओषधियों में पीने योग्य रसको (आ,याहि) प्राप्त होओ आओ (चत्वारिंशता) चालीस पदार्थों से युक्त रथसे (आ) आओ (पञ्चाशता) पचास हरणशील पदार्थों से युक्त (सुरथेभिः) सुन्दर रथों से (आ) आओ (षष्ट्या) साठ वा (सप्तत्या) सत्तर हरणशील पदार्थों से युक्त सुन्दर रथों से आओ ॥५॥
Essence
जैसे बीस-तीस-चालीस-पचास-साठ-सत्तर बलवान् घोड़े एक साथ जोड़कर यान को शीघ्र चलाते हैं, उससे अधिक वेग से अग्नि आदि पदार्थ यान को ले जाते हैं ॥५॥
Subject
फिर वह उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।