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Rigveda Mandal 2 / Sukta 16 / Mantra 7

43 Sukta
9 Mantra
2/16/7
Devata- इन्द्र: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
प्र ते॒ नावं॒ न सम॑ने वच॒स्युवं॒ ब्रह्म॑णा यामि॒ सव॑नेषु॒ दाधृ॑षिः। कु॒विन्नो॑ अ॒स्य वच॑सो नि॒बोधि॑ष॒दिन्द्र॒मुत्सं॒ न वसु॑नः सिचामहे॥

प्र । ते॒ । नाव॑म् । न । सम॑ने । व॒च॒स्युव॑म् । ब्रह्म॑णा । या॒मि॒ । सव॑नेषु । दधृ॑षिः । कु॒वित् । नः॒ । अ॒स्य । वच॑सः । नि॒ऽबोधि॑षत् । इन्द्र॑म् । उत्स॑म् । न । वसु॑नः । सि॒चा॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
प्र ते नावं न समने वचस्युवं ब्रह्मणा यामि सवनेषु दाधृषिः। कुविन्नो अस्य वचसो निबोधिषदिन्द्रमुत्सं न वसुनः सिचामहे॥

प्र। ते। नावम्। न। समने। वचस्युवम्। ब्रह्मणा। यामि। सवनेषु। दधृषिः। कुवित्। नः। अस्य। वचसः। निऽबोधिषत्। इन्द्रम्। उत्सम्। न। वसुनः। सिचामहे॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 18 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् (सवनेषु) ऐश्वर्यों वा प्रेरणाओं में (दाधृषिः) अतीव प्रगल्भ में (ते) तुम्हारे (समने) संग्राम के निमित्त (नावम्) जल में नाव को जैसे (न) वैसे (प्रयामि) प्राप्त होता (ब्रह्मणा) वेद के साथ (वचस्युवम्) अपने को वचन की इच्छा करते अर्थात् वेदशिक्षाओं को चाहते हुए जनको प्राप्त होता (कुवित्) महान् आप (अस्य) इस (वचसः) वचन के सम्बन्ध करनेवाले (नः) हम लोगों को (निबोधिषत्) निश्चित जानो हम लोग (उत्सम्) कूप के (न) समान वा (इन्द्रम्) बिजली के समान ऐश्वर्य के (वसुनः) द्रव्यसम्बन्धी व्यवहारों से (सिचामहे) सींचते हैं ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो नौकाओं से समुद्र में रथों से पृथिवी पर और विमानों से आकाश में युद्ध करते हैं, वे सदा ऐश्वर्य को प्राप्त होते हैं ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।