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Rigveda Mandal 2 / Sukta 13 / Mantra 11

43 Sukta
13 Mantra
2/13/11
Devata- इन्द्र: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सु॒प्र॒वा॒च॒नं तव॑ वीर वी॒र्यं१॒॑ यदेके॑न॒ क्रतु॑ना वि॒न्दसे॒ वसु॑। जा॒तूष्ठि॑रस्य॒ प्र वयः॒ सह॑स्वतो॒ या च॒कर्थ॒ सेन्द्र॒ विश्वा॑स्यु॒क्थ्यः॑॥

सु॒ऽप्र॒वा॒च॒नम् । तव॑ । वी॒र॒ । वी॒र्य॑म् । यत् । एके॑न । क्रतु॑ना । वि॒न्दसे॑ । वसु॑ । जा॒तूऽस्थि॑रस्य । प्र । वयः॑ । सह॑स्वतः । या । च॒कर्थ॑ । सः । इ॒न्द्र॒ । विश्वा॑ । अ॒सि॒ । उ॒क्थ्यः॑ ॥

Mantra without Swara
सुप्रवाचनं तव वीर वीर्यं१ यदेकेन क्रतुना विन्दसे वसु। जातूष्ठिरस्य प्र वयः सहस्वतो या चकर्थ सेन्द्र विश्वास्युक्थ्यः॥

सुऽप्रवाचनम्। तव। वीर। वीर्यम्। यत्। एकेन। क्रतुना। विन्दसे। वसु। जातूऽस्थिरस्य। प्र। वयः। सहस्वतः। या। चकर्थ। सः। इन्द्र। विश्वा। असि। उक्थ्यः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) परमैश्वर्य की प्राप्ति करनेवाले ! जिस कारण आप (उक्थ्यः) प्रशंसा करने योग्य (असि) हो, हे (वीर) प्रशंसित बलयुक्त ! जिन (जातूष्ठिरस्य) कभी स्थिर पाये हुए (सहस्वतः) बलवान् (तव) आपका (सुप्रवाचनम्) सुन्दर अति उत्कृष्ट पढ़ाना, श्रवण कराना और (वीर्यम्) उत्तम पराक्रम है, (तत्) जो आप (एकेन) एक (क्रतुना) कर्म वा ज्ञान से (वयः) विज्ञान और (वसु) धन को (प्रविन्दसे) प्राप्त होते हैं, (या) जिन (विश्वा) समस्त उक्त कामों को (चकर्थ) करते हैं (सः) वह आप उन कामों के लिये हम लोगों के राजा वा उपदेशक वा अध्यापक हूजिये ॥११॥
Essence
जिनके वेद के पारङ्गत अध्यापक विद्वान् प्रेम से उत्तम ज्ञान को देते हैं, वे कभी दुःखी वा निन्दित नहीं होते हैं ॥११॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।