Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 1 / Mantra 10

43 Sukta
16 Mantra
2/1/10
Devata- अग्निः Rishi- आङ्गिरसः शौनहोत्रो भार्गवो गृत्समदः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
त्वम॑ग्न ऋ॒भुरा॒के न॑म॒स्य१॒॑स्त्वं वाज॑स्य क्षु॒मतो॑ रा॒य ई॑शिषे। त्वं वि भा॒स्यनु॑ दक्षि दा॒वने॒ त्वं वि॒शिक्षु॑रसि य॒ज्ञमा॒तनिः॑॥

त्वम् । अ॒ग्ने॒ । ऋ॒भुः । आ॒के । न॒म॒स्यः॑ । त्वम् । वाज॑स्य । क्षु॒ऽमतः॑ । रा॒यः । ई॒शि॒षे॒ । त्वम् । वि । भा॒सि॒ । अनु॑ । ध॒क्षि॒ । दा॒वने॑ । त्वम् । वि॒ऽशिक्षुः॑ । अ॒सि॒ । य॒ज्ञम् । आ॒ऽतनिः॑ ॥

Mantra without Swara
त्वमग्न ऋभुराके नमस्य१स्त्वं वाजस्य क्षुमतो राय ईशिषे। त्वं वि भास्यनु दक्षि दावने त्वं विशिक्षुरसि यज्ञमातनिः॥

त्वम्। अग्ने। ऋभुः। आके। नमस्यः। त्वम्। वाजस्य। क्षुऽमतः। रायः। ईशिषे। त्वम्। वि। भासि। अनु। धक्षि। दावने। त्वम्। विऽशिक्षुः। असि। यज्ञम्। आऽतनिः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 18 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) सर्वशास्त्र पारङ्गत प्रतापवान् राजन् ! (त्वम्) आप (भुः) बुद्धिमान् हैं और (आके) समीप में (नमस्यः) नमस्कार सत्कार करने योग्य हैं। (त्वम्) आप (वाजस्य) विज्ञान निमित्तक (क्षुमतः) बहुत अन्नादि पदार्थ समूह जिसके सम्बन्ध में विद्यमान उस (रायः) धन के (ईशिषे) ईश्वर होते हैं। (त्वम्) आप (विभासि) विशेषता से सब पदार्थों का प्रकाश करते हैं और अग्नि के समान (अनुदक्षि) अनुकूलता से अज्ञान-जन्य दुःख़ को दहन करते हो। (दावने) दानशील (विशिक्षुः) उत्तम शिक्षा करनेवाले (त्वम्) आप (यज्ञम्) यज्ञ का (आतनिः) विस्तार करनेवाले (असि) हैं ॥१०॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो अग्नि के समान प्रजाओं के पीड़ादेनेवालों को जलाते हैं, पुरुषार्थ से ऐश्वर्य की उन्नति करते हैं, विद्या विनय और उत्तम शीलादि का प्रकाश करते हैं, वे सबको माननीय होते हैं ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.