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Rigveda Mandal 1 / Sukta 98 / Mantra 2

191 Sukta
3 Mantra
1/98/2
Devata- अग्निर्वैश्वानरः Rishi- कुत्सः आङ्गिरसः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
पृ॒ष्टो दि॒वि पृ॒ष्टो अ॒ग्निः पृ॑थि॒व्यां पृ॒ष्टो विश्वा॒ ओष॑धी॒रा वि॑वेश। वै॒श्वा॒न॒रः सह॑सा पृ॒ष्टो अ॒ग्निः स नो॒ दिवा॒ स रि॒षः पा॑तु॒ नक्त॑म् ॥

पृ॒ष्टः । दि॒वि । पृ॒ष्टः । अ॒ग्निः । पृ॒थि॒व्याम् । पृ॒ष्टः । विश्वाः॑ । ओष॑धीः । आ । वि॒वे॒श॒ । वै॒श्वा॒न॒रः । सह॑सा । पृ॒ष्टः । अ॒ग्निः । सः । नः॒ । दिवा॑ । सः । रि॒षः । पा॒तु॒ । नक्त॑म् ॥

Mantra without Swara
पृष्टो दिवि पृष्टो अग्निः पृथिव्यां पृष्टो विश्वा ओषधीरा विवेश। वैश्वानरः सहसा पृष्टो अग्निः स नो दिवा स रिषः पातु नक्तम् ॥

पृष्टः। दिवि। पृष्टः। अग्निः। पृथिव्याम्। पृष्टः। विश्वाः। ओषधीः। आ। विवेश। वैश्वानरः। सहसा। पृष्टः। अग्निः। सः। नः। दिवा। सः। रिषः। पातु। नक्तम् ॥ १.९८.२

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 6 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (अग्निः) ईश्वर वा भौतिक अग्नि (दिवि) दिव्यगुण सम्पन्न जगत् में (पृष्टः) विद्वानों के प्रति पूछा जाता वा जो (पृथिव्याम्) अन्तरिक्ष वा भूमि में (पृष्टः) पूछने योग्य है वा जो (पृष्टः) पूछने योग्य (वैश्वानरः) सब मनुष्यमात्र को सत्य व्यवहार में प्रवृत्त करानेहारा (अग्निः) ईश्वर और भौतिक अग्नि (विश्वा) समस्त (ओषधीः) सोमलता आदि ओषधियों में (आ, विवेश) प्रविष्ट हो रहा और (सहसा) बल आदि गुणों के साथ वर्त्तमान (पृष्टः) पूछने योग्य है वह (नः) (सः) हम लोगों को (दिवा) दिन में (रिषः) मारनेवाले से और (नक्तम्) रात्रि में मारनेवाले से (पातु) बचावे वा भौतिक अग्नि बचाता है ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों के समीप जाकर ईश्वर वा बिजुली आदि अग्नि के गुणों को पूछकर ईश्वर की उपासना और अग्नि के गुणों से उपकारों का आश्रय करके हिंसा में न ठहरें ॥ २ ॥
Subject
फिर वे दोनों कैसे हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।