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Rigveda Mandal 1 / Sukta 97 / Mantra 6

191 Sukta
8 Mantra
1/97/6
Devata- अग्निः Rishi- कुत्सः आङ्गिरसः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वत॑: परि॒भूरसि॑। अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥

त्वम् । हि । वि॒श्व॒तः॒ऽमु॒ख॒ । वि॒श्वतः॑ । प॒रि॒ऽभूः । असि॑ । अप॑ । नः॒ । शोशु॑चत् । अ॒घम् ॥

Mantra without Swara
त्वं हि विश्वतोमुख विश्वत: परिभूरसि। अप न: शोशुचदघम् ॥

त्वम्। हि। विश्वतःऽमुख। विश्वतः। परिऽभूः। असि। अप। नः। शोशुचत्। अघम् ॥ १.९७.६

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 5 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वतोमुख) सबमें व्याप्त होने और अन्तर्यामीपन से सबको शिक्षा देनेवाला जगदीश्वर ! जिस कारण (त्वं, हि) आप ही (विश्वतः) सब ओर से (परिभूः) सबके ऊपर विराजमान (असि) हैं, इससे (नः) हम लोगों के (अघम्) दुष्ट स्वभाव सङ्गरूप पाप को (अप, शोशुचत्) दूर कराइये ॥ ६ ॥
Essence
सत्य-सत्य प्रेमभाव से प्रार्थना को प्राप्त हुआ अन्तर्यामी जगदीश्वर मनुष्यों के आत्मा में जो सत्य-सत्य उपदेश से उन मनुष्यों को पाप से अलगकर शुभ गुण, कर्म और स्वभाव में प्रवृत्त करता है, इससे यह नित्य उपासना करने योग्य है ॥ ६ ॥
Subject
अब ईश्वर कैसा है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।