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Rigveda Mandal 1 / Sukta 97 / Mantra 4

191 Sukta
8 Mantra
1/97/4
Devata- अग्निः Rishi- कुत्सः आङ्गिरसः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र यत्ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम्। अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥

प्र । यत् । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । सू॒रयः॑ । जाये॑महि । प्र । ते॒ । व॒यम् । अप॑ । नः॒ । शोशु॑चत् । अ॒घम् ॥

Mantra without Swara
प्र यत्ते अग्ने सूरयो जायेमहि प्र ते वयम्। अप न: शोशुचदघम् ॥

प्र। यत्। ते। अग्ने। सूरयः। जायेमहि। प्र। ते। वयम्। अप। नः। शोशुचत्। अघम् ॥ १.९७.४

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 5 Mantra » 4

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Meaning
हे (अग्ने) आप उत्तर-प्रत्युत्तर से कहनेवाले ! (यत्) जिन (ते) आपके जैसे (सूरयः) पूरी विद्या पढ़े हुए विद्वान् सभासद् हैं, उन (ते) आपके वैसे ही (वयम्) हमलोग भी (प्र, जायेमहि) प्रजाजन हों और ऐसे तुम (नः) हम लोगों के (अघम्) विरोधरूप पाप को (प्र, अप, शोशुचत्) अच्छे प्रकार दूर कीजिये ॥ ४ ॥
Essence
इस संसार में जैसे धर्मिष्ठ सभा आदि के अधीश मनुष्य हों, वैसे ही प्रजाजनों को भी होना चाहिये ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसके कैसे के कैसे हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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