Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 97 / Mantra 3

191 Sukta
8 Mantra
1/97/3
Devata- अग्निः Rishi- कुत्सः आङ्गिरसः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र यद्भन्दि॑ष्ठ एषां॒ प्रास्माका॑सश्च सू॒रय॑:। अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥

प्र । यत् । भन्दि॑ष्ठः । ए॒षा॒म् । प्र । अ॒स्माका॑सः । च॒ । सू॒रयः॑ । अप॑ । नः॒ । शोशु॑चत् । अ॒घम् ॥

Mantra without Swara
प्र यद्भन्दिष्ठ एषां प्रास्माकासश्च सूरय:। अप न: शोशुचदघम् ॥

प्र। यत्। भन्दिष्ठः। एषाम्। प्र। अस्माकासः। च। सूरयः। अप। नः। शोशुचत्। अघम् ॥ १.९७.३

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 5 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे अग्ने सभापते ! (यत्) जिन आपकी सभा में (एषाम्) इन मनुष्य आदि प्रजाजनों के बीच (अस्माकासः) हम लोगों में से (प्र, सूरयः) अत्यन्त बुद्धिमान् विद्वान् (च) और वीरपुरुष हैं वे सभासद् हों, (भन्दिष्ठः) अतिकल्याण करनेहारे आप (नः) हम लोगों के (अघम्) शत्रुजन्य दुःखरूप पाप को (प्र, अप, शोशुचत्) दूर कीजिये ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में भी (अग्ने) इस पद की अनुवृत्ति आती है। जब विद्वान् सभा आदि के अधीश आप्त अर्थात् प्रामाणिक सत्य वचन को कहनेवाले सभासद् और आत्मिक, शारीरिक बल से परिपूर्ण सेवक हों, तब राज्यपालन और विजय अच्छे प्रकार होते हैं, इससे उलटेपन में उलटा ही ढङ्ग होता है ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह सभाध्यक्ष कैसा हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.