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Rigveda Mandal 1 / Sukta 94 / Mantra 10

191 Sukta
16 Mantra
1/94/10
Devata- अग्निः Rishi- कुत्सः आङ्गिरसः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यदयु॑क्था अरु॒षा रोहि॑ता॒ रथे॒ वात॑जूता वृष॒भस्ये॑व ते॒ रव॑:। आदि॑न्वसि व॒निनो॑ धू॒मके॑तु॒नाग्ने॑ स॒ख्ये मा रि॑षामा व॒यं तव॑ ॥

यत् । अयु॑क्थाः । अ॒रु॒षा । रोहि॑ता । रथे॑ । वात॑ऽजूता । वृ॒ष॒भस्य॑ऽइव । ते॒ । आत् । इ॒न्व॒सि॒ । व॒निनः॑ । धू॒मऽके॑तुना । अग्ने॑ । स॒ख्ये । मा । रि॒षा॒म॒ । व॒यम् । तव॑ ॥

Mantra without Swara
यदयुक्था अरुषा रोहिता रथे वातजूता वृषभस्येव ते रव:। आदिन्वसि वनिनो धूमकेतुनाग्ने सख्ये मा रिषामा वयं तव ॥

यत्। अयुक्थाः। अरुषा। रोहिता। रथे। वातऽजूता। वृषभस्यऽइव। ते। रवः। आत्। इन्वसि। वनिनः। धूमऽकेतुना। अग्ने। सख्ये। मा। रिषाम। वयम्। तव ॥ १.९४.१०

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 31 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) समस्त शिल्पव्यवहार के ज्ञान देनेवाले क्रियाचतुर विद्वन् ! जिस कारण आप (यत्) जो कि (ते) आपके वा इस अग्नि के (वृषभस्येव) पदार्थों के ले जानेहारे बलवान् बैल के समान वा (वातजूता) पवन के वेग के समान वेगयुक्त (अरुषा) सीधे स्वभाव (रोहिता) दृढ़ बल आदियुक्त घोड़े (रथे) विमान आदि यानों में जोड़ने के योग्य हैं, उनको (अयुक्थाः) जुड़वाते हैं वा यह भौतिक अग्नि जुड़वाता है, उस रथ से निकला जो (रवः) शब्द उसके साथ वर्त्तमान (धूमकेतुना) जिसमें धूम ही पताका है उस रथ से सब व्यवहारों को (इन्वसि) व्याप्त होते हो वा यह भौतिक अग्नि उक्त प्रकार से व्यवहारों को व्याप्त होता है, इससे (आत्) पीछे (वनिनः) जिनको अच्छे विभाग वा सूर्यकिरणों का सम्बन्ध है (तव) उन आपके वा जिस भौतिक अग्नि को किरणों का सम्बन्ध है उसके (सख्ये) मित्रपन में (वयम्) हम लोग (मा, रिषाम) पीड़ित न हों ॥ १० ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेष और उपमालङ्कार हैं। जिससे शिल्पी और भौतिक अग्नि सर्वहित करनेवाले कामों को सिद्ध कर सकते हैं, उससे विमान आदि यानों की संभावना करने को योग्य हैं ॥ १० ॥
Subject
अब शिल्पी और भौतिक अग्नि के गुणों का उपदेश किया है ।