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Rigveda Mandal 1 / Sukta 93 / Mantra 9

191 Sukta
12 Mantra
1/93/9
Devata- अग्नीषोमौ Rishi- गोतमो राहूगणपुत्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्नी॑षोमा॒ सवे॑दसा॒ सहू॑ती वनतं॒ गिर॑:। सं दे॑व॒त्रा ब॑भूवथुः ॥

अग्नी॑षोमा । सऽवे॑दसा । सहू॑ती॒ इति॒ सऽहू॑ती । व॒न॒त॒म् । गिरः॑ । सम् । दे॒व॒ऽत्रा । ब॒भू॒व॒थुः॒ ॥

Mantra without Swara
अग्नीषोमा सवेदसा सहूती वनतं गिर:। सं देवत्रा बभूवथुः ॥

अग्नीषोमा। सऽवेदसा। सहूती इति सऽहूती। वनतम्। गिरः। सम्। देवऽत्रा। बभूवथुः ॥ १.९३.९

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 29 Mantra » 3

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Meaning
जो (सहूती) एकसी वाणीवाले (सवेदसा) बराबर होमे हुए पदार्थ से युक्त (अग्नीषोमा) यज्ञफल के सिद्ध करनेहारे अग्नि और पवन (देवत्रा) विद्वान् वा दिव्यगुणों में (सम्बभूवथुः) संभावित होते हैं वे (गिरः) वाणियों को (वनतम्) अच्छे प्रकार सेवते हैं ॥ ९ ॥
Essence
मनुष्य लोग यज्ञ आदि उत्तम कामों से वायु के शोधे विना प्राणियों को सुख नहीं हो सकता, इससे इसका अनुष्ठान नित्य करें ॥ ९ ॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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