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Rigveda Mandal 1 / Sukta 93 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/93/7
Devata- अग्नीषोमौ Rishi- गोतमो राहूगणपुत्रः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अग्नी॑षोमा ह॒विष॒: प्रस्थि॑तस्य वी॒तं हर्य॑तं वृषणा जु॒षेथा॑म्। सु॒शर्मा॑णा॒ स्वव॑सा॒ हि भू॒तमथा॑ धत्तं॒ यज॑मानाय॒ शं योः ॥

अग्नी॑षोमा । ह॒विषः॑ । प्रऽस्थि॑तस्य । वी॒तम् । हर्य॑तम् । वृ॒ष॒णा॒ । जु॒षेथा॑म् । सु॒ऽशर्मा॑णा । सु॒ऽअव॑सा । हि । भू॒तम् । अथ॑ । ध॒त्त॒म् । यज॑मानाय । शम् । योः ॥

Mantra without Swara
अग्नीषोमा हविष: प्रस्थितस्य वीतं हर्यतं वृषणा जुषेथाम्। सुशर्माणा स्ववसा हि भूतमथा धत्तं यजमानाय शं योः ॥

अग्नीषोमा। हविषः। प्रऽस्थितस्य। वीतम्। हर्यतम्। वृषणा। जुषेथाम्। सुऽशर्माणा। सुऽअवसा। हि। भूतम्। अथ। धत्तम्। यजमानाय। शम्। योः ॥ १.९३.७

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 29 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम लोग जो (वृषणा) वर्षा होने के निमित्त (सुशर्माणा) श्रेष्ठ सुख करनेवाले (अग्नीषोमा) प्रसिद्ध वायु और अग्नि (प्रस्थितस्य) देशान्तर में पहुँचनेवाले (हविषः) होमे हुए घी आदि को (वीतम्) व्याप्त होते (हर्य्यतम्) पाते (जुषेथाम्) सेवन करते और (स्ववसा) उत्तम रक्षा करनेवाले (भूतम्) होते हैं (अथ) इसके पीछे (हि) इसी कारण (यजमानाय) जीव के लिये अनन्त (शम्) सुख को (धत्तम्) धारण करते तथा (योः) पदार्थों को अलग-अलग करते हैं, उनको अच्छे प्रकार उपयोग में लाओ ॥ ७ ॥
Essence
मनुष्यों को यह जानना चाहिये कि आग में जितने सुगन्धियुक्त पदार्थ होमे जाते हैं, सब पवन के साथ आकाश में जा मेघमण्डल के जल को शोध और सब जीवों के सुख के हेतु होकर उसके अनन्तर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि करनेहारे होते हैं ॥ ७ ॥
Subject
फिर वे क्या करते हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।