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Rigveda Mandal 1 / Sukta 93 / Mantra 2

191 Sukta
12 Mantra
1/93/2
Devata- अग्नीषोमौ Rishi- गोतमो राहूगणपुत्रः Chhanda- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अग्नी॑षोमा॒ यो अ॒द्य वा॑मि॒दं वच॑: सप॒र्यति॑। तस्मै॑ धत्तं सु॒वीर्यं॒ गवां॒ पोषं॒ स्वश्व्य॑म् ॥

अग्नी॑षोमा । यः । अ॒द्य । वा॒म् । इ॒दम् । वचः॑ । स॒प॒र्यति॑ । तस्मै॑ । ध॒त्त॒म् । सु॒ऽवीर्य॑म् । गवा॑म् । पोष॑म् । सु॒ऽअश्व्य॑म् ॥

Mantra without Swara
अग्नीषोमा यो अद्य वामिदं वच: सपर्यति। तस्मै धत्तं सुवीर्यं गवां पोषं स्वश्व्यम् ॥

अग्नीषोमा। यः। अद्य। वाम्। इदम्। वचः। सपर्यति। तस्मै। धत्तम्। सुऽवीर्यम्। गवाम्। पोषम्। सुऽअश्व्यम् ॥ १.९३.२

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 28 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्नीषोमा) पढ़ाने और परीक्षा लेनेवाले विद्वानो ! (यः) जो पढ़नेवाला (अद्य) आज (वाम्) तुम्हारे (इदम्) इस (वचः) विद्या के वचन को (सपर्यति) सेवे (तस्मै) उसके लिये (स्वश्व्यम्) जो अच्छे-अच्छे घोड़ों से युक्त (सुवीर्य्यम्) उत्तम-उत्तम बल जिस विद्याभ्यास से हों, उस (गवाम्) इन्द्रिय और गाय आदि पशुओं के (पोषम्) सर्वथा शरीर और आत्मा की पुष्टि करनेहारे सुख को (धत्तम्) दीजिये ॥ २ ॥
Essence
जो ब्रह्मचारी विद्या के लिये पढ़ाने और परीक्षा करनेवालों के प्रति उत्तम प्रीति को करके और उनकी नित्य सेवा करता है, वही बड़ा विद्वान् होकर सब सुखों को पाता है ॥ २ ॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।