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Rigveda Mandal 1 / Sukta 92 / Mantra 17

191 Sukta
18 Mantra
1/92/17
Devata- उषाः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
यावि॒त्था श्लोक॒मा दि॒वो ज्योति॒र्जना॑य च॒क्रथु॑:। आ न॒ ऊर्जं॑ वहतमश्विना यु॒वम् ॥

यौ । इ॒त्था । श्लोक॑म् । आ । दि॒वः । ज्योतिः॑ । जना॑य । च॒क्रथु॑ह् । आ । नः॒ । ऊर्ज॑म् । व॒ह॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । यु॒वम् ॥

Mantra without Swara
यावित्था श्लोकमा दिवो ज्योतिर्जनाय चक्रथु:। आ न ऊर्जं वहतमश्विना युवम् ॥

यौ। इत्था। श्लोकम्। आ। दिवः। ज्योतिः। जनाय। चक्रथुः। आ। नः। ऊर्जम्। वहतम्। अश्विना। युवम् ॥ १.९२.१७

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 27 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे शिल्पविद्या के पढ़ाने और उपदेश करनेहारे विद्वानो ! (युवम्) तुम लोग जो (अश्विना) अग्नि और वायु (जनाय) मनुष्य समूह के लिये (दिवः) सूर्य्य के (ज्योतिः) प्रकाश को (आ, चक्रथुः) अच्छे प्रकार सिद्ध करते हैं (इत्था) इसलिये (नः) हम लोगों के लिये (श्लोकम्) उत्तम वाणी और (ऊर्जम्) पराक्रम वा अन्नादि पदार्थों को (आ, वहतम्) सब प्रकार से प्राप्त कराओ ॥ १७ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि पवन और बिजुली के विना सूर्य का प्रकाश नहीं होता और उन दोनों ही के विद्या और उपकार के विना किसी की विद्यासिद्धि होती है, ऐसा जानें ॥ १७ ॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।