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Rigveda Mandal 1 / Sukta 92 / Mantra 13

191 Sukta
18 Mantra
1/92/13
Devata- उषाः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृत्परोष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
उष॒स्तच्चि॒त्रमा भ॑रा॒स्मभ्यं॑ वाजिनीवति। येन॑ तो॒कं च॒ तन॑यं च॒ धाम॑हे ॥

उषः॑ । तत् । चि॒त्रम् । आ । भ॒र॒ । अ॒स्मभ्य॑म् । वा॒जि॒नी॒ऽव॒ति॒ । येन॑ । तो॒कम् । च॒ । तन॑यम् । च॒ । धाम॑हे ॥

Mantra without Swara
उषस्तच्चित्रमा भरास्मभ्यं वाजिनीवति। येन तोकं च तनयं च धामहे ॥

उषः। तत्। चित्रम्। आ। भर। अस्मभ्यम्। वाजिनीऽवति। येन। तोकम्। च। तनयम्। च। धामहे ॥ १.९२.१३

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 26 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे सौभाग्यकारिणी स्त्री ! (वाजिनीवति) उत्तम क्रिया और अन्नादि ऐश्वर्य्ययुक्त तू (उषः) प्रभात के तुल्य (अस्मभ्यम्) हमलोगों के लिये (चित्रम्) अद्भुत सुखकर्त्ता धन को (आभर) धारण कर (येन) जिससे हम लोग (तोकम्) पुत्र (च) और इसके पालनार्थ ऐश्वर्य (तनयम्) पौत्रादि (च) स्त्री, भृत्य और भूमि के राज्यादि को (धामहे) धारण करें ॥ १३ ॥
Essence
मनुष्यों से प्रातःसमय से लेके समय के विभागों के योग्य अर्थात् समय-समय के अनुसार व्यवहारों को करके ही सब सुख के साधन और सुख किये जा सकते हैं, इससे उनको यह अनुष्ठान नित्य करना चाहिये ॥ १३ ॥
Subject
मनुष्यों को इससे क्या जानना चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।