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Rigveda Mandal 1 / Sukta 91 / Mantra 9

191 Sukta
23 Mantra
1/91/9
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सोम॒ यास्ते॑ मयो॒भुव॑ ऊ॒तय॒: सन्ति॑ दा॒शुषे॑। ताभि॑र्नोऽवि॒ता भ॑व ॥

सोम॑ । याः । ते॒ । म॒यः॒ऽभुवः॑ । ऊ॒तयः॑ । सन्ति॑ । दा॒शुषे॑ । ताभिः॑ । नः॒ । अ॒वि॒ता । भ॒व॒ ॥

Mantra without Swara
सोम यास्ते मयोभुव ऊतय: सन्ति दाशुषे। ताभिर्नोऽविता भव ॥

सोम। याः। ते। मयःऽभुवः। ऊतयः। सन्ति। दाशुषे। ताभिः। नः। अविता। भव ॥ १.९१.९

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 20 Mantra » 4

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Meaning
हे (सोम) परमेश्वर ! (याः) जो (ते) आपकी वा सोम आदि ओषधिगण की (मयोभुवः) सुख को उत्पन्न करनेवाली (ऊतयः) रक्षा आदि क्रिया (दाशुषे) दानी मनुष्य के लिये (सन्ति) हैं (ताभिः) उनसे (नः) हमलोगों के (अविताः) रक्षा आदि के करनेवाले (भव) हूजिये वा जो यह ओषधिगण होता है, इनका उपयोग हम लोग सदा करें ॥ ९ ॥
Essence
जिन प्राणियों की परमेश्वर, विद्वान् और अच्छी सिद्ध की हुई ओषधि रक्षा करनेवाली होती हैं, वे कहाँ से दुःख देखें ॥ ९ ॥
Subject
वह किनसे रक्षा करता है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।

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