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Rigveda Mandal 1 / Sukta 91 / Mantra 7

191 Sukta
23 Mantra
1/91/7
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- वर्धमाना गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं सो॑म म॒हे भगं॒ त्वं यून॑ ऋताय॒ते। दक्षं॑ दधासि जी॒वसे॑ ॥

त्वम् । सो॒म॒ । म॒हे । भग॑म् । त्वम् । यूने॑ । ऋ॒त॒ऽय॒ते । दक्ष॑म् । द॒धा॒सि॒ । जी॒वसे॑ ॥

Mantra without Swara
त्वं सोम महे भगं त्वं यून ऋतायते। दक्षं दधासि जीवसे ॥

त्वम्। सोम। महे। भगम्। त्वम्। यूने। ऋतऽयते। दक्षम्। दधासि। जीवसे ॥ १.९१.७

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 20 Mantra » 2

Bhashya

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Meaning
हे (सोम) परमेश्वर ! वा सोम अर्थात् औषधियों का समूह (त्वम्) विद्या और सौभाग्य के देनेहारे आप वा यह सोम (ऋतायते) अपने को विशेष ज्ञान की इच्छा करनेहारे (महे) अति उत्तम गुणयुक्त (यूने) ब्रह्मचर्य्य और विद्या से शरीर और आत्मा की तरुण अवस्था को प्राप्त हुए ब्रह्मचारी के लिये (भगम्) विद्या और धनराशि तथा (त्वम्) आप (जीवसे) जीने के अर्थ (दक्षम्) बल को (दधासि) धारण कराने से सबको चाहने योग्य हैं ॥ ७ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। मनुष्यों को परस्पर विद्वान् और ओषधियों के सेवन के विना सुख होने को योग्य नहीं है, इससे यह आचरण सबको नित्य करने योग्य है ॥ ७ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।

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