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Rigveda Mandal 1 / Sukta 91 / Mantra 6

191 Sukta
23 Mantra
1/91/6
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं च॑ सोम नो॒ वशो॑ जी॒वातुं॒ न म॑रामहे। प्रि॒यस्तो॑त्रो॒ वन॒स्पति॑: ॥

त्वम् । च॒ । सो॒म॒ । नः॒ । वशः॑ । जी॒वातु॑म् । न । म॒रा॒म॒हे॒ । प्रि॒यऽस्तो॑त्रः । वन॒स्पतिः॑ ॥

Mantra without Swara
त्वं च सोम नो वशो जीवातुं न मरामहे। प्रियस्तोत्रो वनस्पति: ॥

त्वम्। च। सोम। नः। वशः। जीवातुम्। न। मरामहे। प्रियऽस्तोत्रः। वनस्पतिः ॥ १.९१.६

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 20 Mantra » 1

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Meaning
हे (सोम) श्रेष्ठ कामों में प्रेरणा देनेहारे परमेश्वर ! वा श्रेष्ठ कामों में प्रेरणा देता जो (त्वम्) सो यह (च) और आप (नः) हमलोगों के (जीवातुम्) जीवन को (वशः) वश होने के गुणों का प्रकाश करने वा (प्रियस्तोत्रः) जिनके गुणों का कथन प्रेम करने-करानेवाला है वा (वनस्पतिः) सेवनीय पदार्थों की पालना करनेहारे वा यह सोम जङ्गली ओषधियों में अत्यन्त श्रेष्ठ है, इस व्यवस्था से इन दोनों को जानकर हम लोग शीघ्र (न) (मरामहे) अकाल मृत्यु और अनायास मृत्यु न पावें ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। जो मनुष्य ईश्वर की आज्ञा पालनेहारे विद्वानों और ओषधियों का सेवन करते हैं, वे पूरी आयु पाते हैं ॥ ६ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।

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