Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 91 / Mantra 17

191 Sukta
23 Mantra
1/91/17
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- परोष्निक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
आ प्या॑यस्व मदिन्तम॒ सोम॒ विश्वे॑भिरं॒शुभि॑:। भवा॑ नः सु॒श्रव॑स्तम॒: सखा॑ वृ॒धे ॥

आ । प्या॒य॒स्व॒ । म॒दि॒न्ऽत॒म॒ । सोम॑ । विश्वे॑भिः । अं॒शुऽभिः॑ । भव॑ । नः॒ । सु॒श्रवः॑ऽतमः । सखा॑ । वृ॒धे ॥

Mantra without Swara
आ प्यायस्व मदिन्तम सोम विश्वेभिरंशुभि:। भवा नः सुश्रवस्तम: सखा वृधे ॥

आ। प्यायस्व। मदिन्ऽतम। सोम। विश्वेभिः। अंशुऽभिः। भव। नः। सुश्रवःऽतमः। सखा। वृधे ॥ १.९१.१७

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 22 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (मदिन्तम) अत्यन्त प्रशंसित आनन्दयुक्त (सोम) विद्या और ऐश्वर्य के देनेवाले ! जो (सुश्रवस्तमः) बहुश्रुत वा अच्छे अन्नादि पदार्थों से युक्त (सखा) आप मित्र हैं सो (नः) हम लोगों के (वृधे) उन्नति के लिये (भव) हूजिये और (विश्वेभिः) समस्त (अंशुभिः) सृष्टि के सिद्धान्तभागों =तत्त्वावयवों से (आ) अच्छे प्रकार (प्यायस्व) वृद्धि को प्राप्त हूजिये ॥ १७ ॥
Essence
जो उत्तम विद्वान् समस्त उत्तम ओषधिगण से सृष्टिक्रम की विद्याओं में मनुष्यों की उन्नति करता है, उसके अनुकूल सबको चलना चाहिये ॥ १७ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।