Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 91 / Mantra 16

191 Sukta
23 Mantra
1/91/16
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ प्या॑यस्व॒ समे॑तु ते वि॒श्वत॑: सोम॒ वृष्ण्य॑म्। भवा॒ वाज॑स्य संग॒थे ॥

आ । प्या॒य॒स्व॒ । सम् । ए॒तु॒ । ते॒ । वि॒श्वतः॑ । सो॒म॒ । वृष्ण्य॑म् । भव॑ । वाज॑स्य । स॒म्ऽग॒थे ॥

Mantra without Swara
आ प्यायस्व समेतु ते विश्वत: सोम वृष्ण्यम्। भवा वाजस्य संगथे ॥

आ। प्यायस्व। सम्। एतु। ते। विश्वतः। सोम। वृष्ण्यम्। भव। वाजस्य। सम्ऽगथे ॥ १.९१.१६

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 22 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (सोम) अत्यन्त पराक्रमयुक्त वैद्यकशास्त्र को जाननेहारे विद्वान् ! (ते) आपका (विश्वतः) संपूर्ण सृष्टि से (वृष्ण्यम्) वीर्य्यवानों में उत्पन्न पराक्रम है, वह हम लोगों को (सम् एतु) अच्छी प्रकार प्राप्त हो तथा आप (आप्यायस्व) उन्नति को प्राप्त और (वाजस्य) वेगवाली सेना के (संगथे) संग्राम में रोगनाशक (भव) हूजिये ॥ १६ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि विद्वान् और औषधिगणों का सेवनकर, बल और विद्या को प्राप्त हो, समस्त सृष्टि की अत्युत्तम विद्याओं को उन्नति कर, शत्रुओं को जीत और सज्जनों की रक्षाकर, शरीर और आत्मा की पुष्टि निरन्तर बढ़ावें ॥ १६ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।