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Rigveda Mandal 1 / Sukta 90 / Mantra 6

191 Sukta
9 Mantra
1/90/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मधु॒ वाता॑ ऋताय॒ते मधु॑ क्षरन्ति॒ सिन्ध॑वः। माध्वी॑र्नः स॒न्त्वोष॑धीः ॥

मधु॑ । वाताः॑ । ऋ॒त॒य॒ते । मधु॑ । क्ष॒र॒न्ति॒ । सिन्ध॑वः । माध्वीः॑ । नः॒ । स॒न्तु॒ । ओष॑धीः ॥

Mantra without Swara
मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः ॥

मधु। वाताः। ऋतयते। मधु। क्षरन्ति। सिन्धवः। माध्वीः। नः। सन्तु। ओषधीः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 18 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे पूर्ण विद्यावाले विद्वानो ! जैसे तुम्हारे लिये और (ऋतायते) अपने को सत्य व्यवहार चाहनेवाले पुरुष के लिये (वाताः) वायु (मधु) मधुरता और (सिन्धवः) समुद्र वा नदियाँ (मधु) मधुर गुण को (क्षरन्ति) वर्षा करती हैं, वैसे (नः) हमारे लिये (ओषधीः) सोमलता आदि ओषधि (माध्वीः) मधुरगुण के विशेष ज्ञान करानेवाली (सन्तु) हों ॥ ६ ॥
Essence
हे पढ़ाने वालो ! तुम और हम ऐसा अच्छा यत्न करें कि जिससे सृष्टि के पदार्थों से समग्र आनन्द के लिये विद्या करके उपकारों को ग्रहण कर सकें ॥ ६ ॥
Subject
विद्या से क्या उत्पन्न होता है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥