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Rigveda Mandal 1 / Sukta 90 / Mantra 2

191 Sukta
9 Mantra
1/90/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते हि वस्वो॒ वस॑वाना॒स्ते अप्र॑मूरा॒ महो॑भिः। व्र॒ता र॑क्षन्ते वि॒श्वाहा॑ ॥

ते । हि । वस्वः॑ । वस॑वानाः । ते । अप्र॑ऽमूराः । महः॑ऽभिः । व्र॒ता । र॒क्ष॒न्ते॒ । वि॒श्वाहा॑ ॥

Mantra without Swara
ते हि वस्वो वसवानास्ते अप्रमूरा महोभिः। व्रता रक्षन्ते विश्वाहा ॥

ते। हि। वस्वः। वसवानाः। ते। अप्रऽमूराः। महःऽभिः। व्रता। रक्षन्ते। विश्वाहा ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 17 Mantra » 2

Bhashya

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Meaning
(ते) वे पूर्वोक्त विद्वान् लोग (वसवानाः) अपने गुणों से सबको ढाँपते हुए (हि) निश्चय से (महोभिः) प्रशंसनीय गुण और कर्मों से (विश्वाहा) सब दिनों में (वस्वः) धन आदि पदार्थों की (रक्षन्ते) रक्षा करते हैं तथा जो (अप्रमूराः) मूढ़त्वप्रमादरहित धार्मिक विद्वान् हैं (ते) वे प्रशंसनीय गुण कर्मों से सब दिन (व्रता) सत्यपालन आदि नियमों को रखते हैं ॥ २ ॥
Essence
विद्वानों के विना किसी से धन और धर्मयुक्त आचार रक्खे नहीं जा सकते। इससे सब मनुष्यों को नित्य विद्याप्रचार करना चाहिये, जिससे सब मनुष्य विद्वान् होके धार्मिक हों ॥ २ ॥
Subject
फिर वे विद्वान् कैसे होकर क्या करें, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

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