Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 9 / Mantra 8

191 Sukta
10 Mantra
1/9/8
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्मे धे॑हि॒ श्रवो॑ बृ॒हद्द्यु॒म्नं स॑हस्र॒सात॑मम्। इन्द्र॒ ता र॒थिनी॒रिषः॑॥

अ॒स्मे इति॑ । धे॒हि॒ । श्रवः॑ । बृ॒हत् । द्यु॒म्नम् । स॒ह॒स्र॒ऽसात॑मम् । इन्द्र॑ । ताः । र॒थिनिः॑ । इषः॑ ॥

Mantra without Swara
अस्मे धेहि श्रवो बृहद्द्युम्नं सहस्रसातमम्। इन्द्र ता रथिनीरिषः॥

अस्मे इति। धेहि। श्रवः। बृहत्। द्युम्नम्। सहस्रऽसातमम्। इन्द्र। ताः। रथिनीः। इषः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 18 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) अत्यन्तबलयुक्त ईश्वर ! आप (अस्मे) हमारे लिये (सहस्रसातमम्) असंख्यात सुखों का मूल (बृहत्) नित्य वृद्धि को प्राप्त होने योग्य (द्युम्नम्) प्रकाशमय ज्ञान तथा (श्रवः) पूर्वोक्त धन और (रथिनीरिषः) अनेक रथ आदि साधनसहित सेनाओं को (धेहि) अच्छे प्रकार दीजिये॥८॥
Essence
हे जगदीश्वर ! आप कृपा करके जो अत्यन्त पुरुषार्थ के साथ जिस धन कर के बहुत से सुखों को सिद्ध करनेवाली सेना प्राप्त होती है, उसको हम लोगों में नित्य स्थापन कीजिये॥८॥
Subject
फिर भी पूर्वोक्त धन कैसा होना चाहिये, इस विषय का प्रकाश अगले मन्त्र में किया है-