Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 9 / Mantra 3

191 Sukta
10 Mantra
1/9/3
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मत्स्वा॑ सुशिप्र म॒न्दिभिः॒ स्तोमे॑भिर्विश्वचर्षणे। सचै॒षु सव॑ने॒ष्वा॥

मत्स्व॑ । सु॒ऽशि॒प्र॒ । म॒न्दिऽभिः । स्तोमे॑भिः । वि॒श्व॒ऽच॒र्ष॒णे॒ । सचा॑ । ए॒षु । सव॑नेषु । आ ॥

Mantra without Swara
मत्स्वा सुशिप्र मन्दिभिः स्तोमेभिर्विश्वचर्षणे। सचैषु सवनेष्वा॥

मत्स्व। सुऽशिप्र। मन्दिऽभिः। स्तोमेभिः। विश्वऽचर्षणे। सचा। एषु। सवनेषु। आ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 17 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वचर्षणे) सब संसार के देखने तथा (सुशिप्र) श्रेष्ठज्ञानयुक्त परमेश्वर ! आप (मन्दिभिः) जो विज्ञान वा आनन्द के करनेवाले (स्तोमेभिः) वेदोक्त स्तुतिरूप गुणप्रकाश करनेहारे स्तोत्र हैं, उनसे स्तुति को प्राप्त होकर (एषु) इन प्रत्यक्ष (सवनेषु) ऐश्वर्य्य देनेवाले पदार्थों में हम लोगों को (सचा) युक्त करके (मत्स्व) अच्छे प्रकार आनन्दित कीजिये॥३॥
Essence
जिसने संसार के प्रकाश करनेवाले सूर्य्य को उत्पन्न किया है, उसकी स्तुति करने में जो श्रेष्ठ पुरुष एकाग्रचित्त हैं, अथवा सबको देखनेवाले परमेश्वर को जानकर सब प्रकार से धार्मिक और पुरुषार्थी होकर सब ऐश्वर्य्य को उत्पन्न और उस की रक्षा करने में मिलकर रहते हैं, वे ही सब सुखों को प्राप्त होने के योग्य वा औरों को भी उत्तम-उत्तम सुखों के देनेवाले हो सकते हैं॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में इन्द्रशब्द से परमेश्वर का प्रकाश किया है-