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Rigveda Mandal 1 / Sukta 89 / Mantra 2

191 Sukta
10 Mantra
1/89/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
दे॒वानां॑ भ॒द्रा सु॑म॒तिर्ऋ॑जूय॒तां दे॒वानां॑ रा॒तिर॒भि नो॒ नि व॑र्तताम्। दे॒वानां॑ स॒ख्यमुप॑ सेदिमा व॒यं दे॒वा न॒ आयुः॒ प्र ति॑रन्तु जी॒वसे॑ ॥

दे॒वाना॑म् । भ॒द्रा । सु॒ऽम॒तिः । ऋ॒जु॒ऽय॒ताम् । दे॒वाना॑म् । रा॒तिः । अ॒भि । नः॒ । नि । व॒र्त॒ता॒म् । दे॒वाना॑म् । स॒ख्यम् । उप॑ । से॒दि॒म॒ । व॒यम् । दे॒वाः । नः॒ । आयुः॑ । प्र । ति॒र॒न्तु॒ । जी॒वसे॑ ॥

Mantra without Swara
देवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवानां रातिरभि नो नि वर्तताम्। देवानां सख्यमुप सेदिमा वयं देवा न आयुः प्र तिरन्तु जीवसे ॥

देवानाम्। भद्रा। सुऽमतिः। ऋजुऽयताम्। देवानाम्। रातिः। अभि। नः। नि। वर्तताम्। देवानाम्। सख्यम्। उप। सेदिम। वयम्। देवाः। नः। आयुः। प्र। तिरन्तु। जीवसे ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 15 Mantra » 2

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Meaning
(वयम्) हम लोग जो (ऋजूयताम्) अपने को कोमलता चाहते हुए (देवानाम्) विद्वान् लोगों की (भद्रा) सुख करनेवाली (सुमतिः) श्रेष्ठ बुद्धि वा जो अपने को निरभिमानता चाहनेवाले (देवानाम्) दिव्य गुणों की (रातिः) विद्या का दान और जो अपने को सरलता चाहते हुए (देवानाम्) दया से विद्या की वृद्धि करना चाहते हैं, उन विद्वानों का जो सुख देनेवाला (सख्यम्) मित्रपन है, यह सब (नः) हमारे लिये (अभि+नि+वर्त्तताम्) सम्मुख नित्य रहे। और उक्त समस्त व्यवहारों को (उप+सेदिम) प्राप्त हों। और उक्त जो (देवाः) विद्वान् लोग हैं, वे (नः) हम लोगों के (जीवसे) जीवन के लिये (आयुः) उमर को (प्र+तिरन्तु) अच्छी शिक्षा से बढ़ावें ॥ २ ॥
Essence
उत्तम विद्वानों के सङ्ग और ब्रह्मचर्य्य आदि नियमों के विना किसी का शरीर और आत्मा का बल बढ़ नहीं सकता, इससे सबको चाहिये कि इन विद्वानों का सङ्ग नित्य करें और जितेन्द्रिय रहें ॥ २ ॥
Subject
सब मनुष्यों को विद्वानों से क्या-क्या पाना चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

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