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Rigveda Mandal 1 / Sukta 87 / Mantra 4

191 Sukta
6 Mantra
1/87/4
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणपुत्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स हि स्व॒सृत्पृष॑दश्वो॒ युवा॑ ग॒णो॒३॒॑या ई॑शा॒नस्तवि॑षीभि॒रावृ॑तः। असि॑ स॒त्य ऋ॑ण॒यावाने॑द्यो॒ऽस्या धि॒यः प्रा॑वि॒ताथा॒ वृषा॑ ग॒णः ॥

सः । हि । स्व॒ऽसृत् । पृष॑त्ऽअश्वः । युवा॑ । ग॒णः । अ॒या । ई॒शा॒नः । तवि॑षीऽभिः॑ । आऽव् ऋतः । असि॑ । स॒त्यः । ऋ॒ण॒ऽयावा॑ । अने॑द्यः । अ॒स्याः । धि॒यः । प्र॒ऽअ॒वि॒ता । अथ॑ । वृषा॑ । ग॒णः ॥

Mantra without Swara
स हि स्वसृत्पृषदश्वो युवा गणो३या ईशानस्तविषीभिरावृतः। असि सत्य ऋणयावानेद्योऽस्या धियः प्राविताथा वृषा गणः ॥

सः। हि। स्वऽसृत्। पृषत्ऽअश्वः। युवा। गणः। अया। ईशानः। तविषीऽभिः। आऽव् ऋतः। असि। सत्यः। ऋणऽयावा। अनेद्यः। अस्याः। धियः। प्रऽअविता। अथ। वृषा। गणः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 13 Mantra » 4

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Meaning
हे सेनापते ! (सः) (हि) वही तू (अया) जिससे सब विद्या जानी जाती हैं, उस बुद्धि से युक्त (वृषाः) शीतल मन्द सुगन्धिपन से सुखरूपी वर्षा करने में समर्थ (गणः) पवनों के समान वेग बलयुक्त (स्वसृत्) अपने लोगों को प्राप्त होनेवाला (पृषदश्वः) वा मेघ के वेग के समान जिसके घोड़े हैं (युवा) तथा जवानी को पहुँचा हुआ (गणः) अच्छे सज्जनों में गिनती करने के योग्य (ईशानः) परिपूर्णसामर्थ्य युक्त (सत्यः) सज्जनों में सीधे स्वभाव वा (ऋणयावा) दूसरों का ऋण चुकानेवाला (अनेद्यः) प्रशंसनीय और (अस्याः) इस (धियः) बुद्धि वा कर्म की (प्राविता) रक्षा करनेहारा (तविषीभिः) परिपूर्णबलयुक्त सेनाओं से (आवृतः) युक्त (असि) है (अथ) इसके अनन्तर हम लोगों के सत्कार करने योग्य भी है ॥ ४ ॥
Essence
ब्रह्मचर्य और विद्या से परिपूर्ण शारीरिक और आत्मिक बलयुक्त अपनी सेना से रक्षा को प्राप्त सेनापति सेना की निरन्तर रक्षा करके शत्रुओं को जीतके प्रजा का पालन करे ॥ ४ ॥
Subject
फिर सेनायुक्त सेना का अधीश वीर कैसा होता है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

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