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Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 9

191 Sukta
10 Mantra
1/86/9
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यू॒यं तत्स॑त्यशवस आ॒विष्क॑र्त महित्व॒ना। विध्य॑ता वि॒द्युता॒ रक्षः॑ ॥

यू॒यम् । तत् । स॒त्य॒ऽश॒व॒सः॒ । आ॒विः । क॒र्त॒ । म॒हि॒ऽत्व॒ना । विध्य॑त । वि॒ऽद्युता॑ । रक्षः॑ ॥

Mantra without Swara
यूयं तत्सत्यशवस आविष्कर्त महित्वना। विध्यता विद्युता रक्षः ॥

यूयम्। तत्। सत्यऽशवसः। आविः। कर्त। महिऽत्वना। विध्यत। विऽद्युता। रक्षः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सत्यशवसः) नित्यबलयुक्त सभाद्यध्यक्ष आदि सज्जनो ! (यूयम्) तुम (महित्वना) उत्तम यश से (तत्) उस काम को (आविः) प्रकट (कर्त्त) करो कि जिससे (विद्युता) बिजुली के लोहे से बनाये हुए शस्त्र वा आग्नेयादि अस्त्रों के समूह से (रक्षः) खोटे काम करनेवाले दुष्ट मनुष्यों को (विध्यता) ताड़ना देते हुए मेरी सब कामना सिद्ध हों ॥ ९ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिए कि परस्पर प्रीति और पुरुषार्थ के साथ विद्युत् आदि पदार्थविद्या और अच्छे-अच्छे गुणों को पाकर दुष्ट स्वभावी और दुर्गुणी मनुष्यों को दूर कर नित्य अपनी कामना सिद्ध करें ॥ ९ ॥
Subject
अब और मनुष्यों को उन सभाध्यक्ष आदि मनुष्यों से कैसे प्रार्थना करनी चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥