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Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 8

191 Sukta
10 Mantra
1/86/8
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
श॒श॒मा॒नस्य॑ वा नरः॒ स्वेद॑स्य सत्यशवसः। वि॒दा काम॑स्य॒ वेन॑तः ॥

श॒श॒मा॒नस्य॑ । वा॒ । न॒रः॒ । स्वेद॑स्य । स॒त्य॒ऽश॒व॒सः॒ । वि॒द । काम॑स्य । वेन॑तः ॥

Mantra without Swara
शशमानस्य वा नरः स्वेदस्य सत्यशवसः। विदा कामस्य वेनतः ॥

शशमानस्य। वा। नरः। स्वेदस्य। सत्यऽशवसः। विद। कामस्य। वेनतः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नरः) मनुष्यो ! तुम सभाध्यक्षादिकों के संग (वा) पुरुषार्थ से (शशमानस्य) जानने योग्य (सत्यशवसः) जिसमें नित्य पुरुषार्थ करना हो (वेनतः) जो कि सब शास्त्रों से सुना जाता हो तथा कामना के योग्य और (स्वेदस्य) पुरुषार्थ से सिद्ध होता है, उस (कामस्य) काम को (विद) जानो अर्थात् उसको स्मरण से सिद्ध करो ॥ ८ ॥
Essence
कोई पुरुष विद्वानों के संग विना सत्य काम और अच्छे-बुरे को जान नहीं सकता। इससे सबको विद्वानों का संग करना चाहिये ॥ ८ ॥
Subject
उनके सङ्ग से मनुष्यों को क्या जानना चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥