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Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/86/7
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सु॒भगः॒ स प्र॑यज्यवो॒ मरु॑तो अस्तु॒ मर्त्यः॑। यस्य॒ प्रयां॑सि॒ पर्ष॑थ ॥

सु॒ऽभगः॑ । सः । प्र॒ऽय॒ज्य॒वः॒ । मरु॑तः । अ॒स्तु॒ । मर्त्यः॑ । यस्य॑ । प्रयां॑सि । पर्ष॑थ ॥

Mantra without Swara
सुभगः स प्रयज्यवो मरुतो अस्तु मर्त्यः। यस्य प्रयांसि पर्षथ ॥

सुऽभगः। सः। प्रऽयज्यवः। मरुतः। अस्तु। मर्त्यः। यस्य। प्रयांसि। पर्षथ ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (प्रयज्यवः) अच्छे-अच्छे यज्ञादि कर्म करनेवाले (मरुतः) सभाध्यक्ष आदि विद्वानो ! तुम (यस्य) जिसके लिये (प्रयांसि) अत्यन्त प्रीति करने योग्य मनोहर पदार्थों को (पर्षथ) परसते अर्थात् देते हो (सः) वह (मर्त्यः) मनुष्य (सुभगः) श्रेष्ठ धन और ऐश्वर्य्ययुक्त (अस्तु) हो ॥ ७ ॥
Essence
जिन मनुष्यों के सभाध्यक्ष आदि विद्वान् रक्षा करनेवाले हैं, वे क्योंकर सुख और ऐश्वर्य्य को न पावें? ॥ ७ ॥
Subject
उनकी रक्षा और शिक्षा पाया हुआ मनुष्य कैसा होता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥