Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 6

191 Sukta
10 Mantra
1/86/6
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पू॒र्वाभि॒र्हि द॑दाशि॒म श॒रद्भि॑र्मरुतो व॒यम्। अवो॑भिश्चर्षणी॒नाम् ॥

पू॒र्वीभिः॑ । हि । द॒दा॒शि॒म । श॒रत्ऽभिः॑ । म॒रु॒तः॒ । व॒यम् । अवः॑ऽभिः । च॒र्ष॒णी॒नाम् ॥

Mantra without Swara
पूर्वाभिर्हि ददाशिम शरद्भिर्मरुतो वयम्। अवोभिश्चर्षणीनाम् ॥

पूर्वीभिः। हि। ददाशिम। शरत्ऽभिः। मरुतः। वयम्। अवःऽभिः। चर्षणीनाम् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) सभाध्यक्ष आदि सज्जनो ! जैसे तुम लोग (पूर्वीभिः) प्राचीन सनातन (शरद्भिः) सब ऋतु वा (अवोभिः) रक्षा आदि अच्छे-अच्छे व्यवहारों से (चर्षणीनाम्) सब मनुष्यों के सुख के लिये अच्छे प्रकार अपना वर्त्ताव वर्त्त रहे हो, वैसे (हि) निश्चय से (वयम्) हम प्रजा, सभा और पाठशालास्थ आदि प्रत्येक शाला के पुरुष आप लोगों को सुख (ददाशिम) देवें ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे सब ऋतु में ठहरनेवाले वायु प्राणियों की रक्षा कर उनको सुख पहुँचाते हैं, वैसे ही विद्वान् लोग सबके सुख के लिये प्रवृत्त हों, न कि किसी के दुःख के लिये ॥ ६ ॥
Subject
सब हम मिल के क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥