Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 4

191 Sukta
10 Mantra
1/86/4
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्य वी॒रस्य॑ ब॒र्हिषि॑ सु॒तः सोमो॒ दिवि॑ष्टिषु। उ॒क्थं मद॑श्च शस्यते ॥

अ॒स्य । वी॒रस्य॑ । ब॒र्हिषि॑ । सु॒तः । सोमः॑ । दिवि॑ष्टिषु । उ॒क्थम् । मदः॑ । च॒ । श॒स्य॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
अस्य वीरस्य बर्हिषि सुतः सोमो दिविष्टिषु। उक्थं मदश्च शस्यते ॥

अस्य। वीरस्य। बर्हिषि। सुतः। सोमः। दिविष्टिषु। उक्थम्। मदः। च। शस्यते ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 11 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! आपके सुशिक्षित (अस्य) इस (वीरस्य) वीर का (सुतः) सिद्ध किया हुआ (सोमः) ऐश्वर्य (दिविष्टिषु) उत्तम इष्टिरूप कर्मों से सुखयुक्त व्यवहारों में (उक्थम्) प्रशंसित वचन (बर्हिषि) उत्तम व्यवहार के करने में (मदः) आनन्द (च) और सद्विद्यादि गुणों का समूह (शस्यते) प्रशंसित होता है, अन्य का नहीं ॥ ४ ॥
Essence
विद्वानों की शिक्षा के विना मनुष्यों में उत्तम गुण उत्पन्न नहीं होते। इससे इसका अनुष्ठान नित्य करना चाहिये ॥ ४ ॥
Subject
फिर उन शिक्षित मनुष्यों से क्या होता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥