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Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 3

191 Sukta
10 Mantra
1/86/3
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त वा॒ यस्य॑ वा॒जिनोऽनु॒ विप्र॒मत॑क्षत। स गन्ता॒ गोम॑ति व्र॒जे ॥

उ॒त । वा॒ । यस्य॑ । वा॒जिनः॑ । अनु॑ । विप्र॑म् । अत॑क्षत । सः । गन्ता॑ । गोऽम॑ति । व्र॒जे ॥

Mantra without Swara
उत वा यस्य वाजिनोऽनु विप्रमतक्षत। स गन्ता गोमति व्रजे ॥

उत। वा। यस्य। वाजिनः। अनु। विप्रम्। अतक्षत। सः। गन्ता। गोऽमति। व्रजे ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 11 Mantra » 3

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Meaning
(वाजिनः) उत्तम विज्ञानयुक्त विद्वानो ! तुम (यस्य) जिस क्रियाकुशल विद्वान् (वा) पढ़ानेहारे के समीप से विद्या को प्राप्त हुए (विप्रम्) विद्वान् को (अन्वतक्षत) सूक्ष्म प्रज्ञायुक्त करते हो (सः) वह (गोमति) उत्तम इन्द्रिय विद्या प्रकाशयुक्त (वज्रे) प्राप्त होने के योग्य मार्ग में (उत) भी (गन्ता) प्राप्त होवे ॥ ३ ॥
Essence
तीव्रबुद्धि और शिल्पविद्या सिद्ध विमानादि यानों के विना मनुष्य देश-देशान्तर में सुख से जाने-आने को समर्थ नहीं हो सकते, उस कारण अति पुरुषार्थ से विमानादि यानों को यथावत् सिद्ध करें ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

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