Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 86 / Mantra 2

191 Sukta
10 Mantra
1/86/2
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य॒ज्ञैर्वा॑ यज्ञवाहसो॒ विप्र॑स्य वा मती॒नाम्। मरु॑तः शृणु॒ता हव॑म् ॥

य॒ज्ञैः । वा॒ । य॒ज्ञ॒ऽवा॒ह॒सः॒ । विप्र॑स्य । वा॒ । म॒ती॒नाम् । मरु॑तः । शृ॒णु॒त । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
यज्ञैर्वा यज्ञवाहसो विप्रस्य वा मतीनाम्। मरुतः शृणुता हवम् ॥

यज्ञैः। वा। यज्ञऽवाहसः। विप्रस्य। वा। मतीनाम्। मरुतः। शृणुत। हवम् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 11 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (यज्ञवाहसः) सत्सङ्गरूप प्रिय यज्ञों को प्राप्त करानेवाले विद्वानो ! तुम लोग (मरुतः) वायु के समान (यज्ञैः) अपने (वा) पराये पढ़ने-पढ़ाने और उपदेशरूप यज्ञों से (विप्रस्य) विद्वान् (वा) वा (मतीनाम्) बुद्धिमानों के (हवम्) परीक्षा के योग्य पठन-पाठनरूप व्यवहार को (शृणुत) सुना कीजिये ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। मनुष्यों को योग्य है कि जानने-जनाने वा क्रियाओं से सिद्ध यज्ञों से युक्त होकर, अन्य मनुष्यों को युक्त करा, यथावत्परीक्षा करके विद्वान् करना चाहिये ॥ २ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥