Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 85 / Mantra 11

191 Sukta
12 Mantra
1/85/11
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
जि॒ह्मं नु॑नुद्रेऽव॒तं तया॑ दि॒शासि॑ञ्च॒न्नुत्सं॒ गोत॑माय तृ॒ष्णजे॑। आ ग॑च्छन्ती॒मव॑सा चि॒त्रभा॑नवः॒ कामं॒ विप्र॑स्य तर्पयन्त॒ धाम॑भिः ॥

जि॒ह्मम् । नु॒नु॒द्रे॒ । अ॒व॒तम् । तया॑ । दि॒शा । असि॑ञ्चन् । उत्स॑म् । गोत॑माय । तृ॒ष्णऽजे॑ । आ । ग॒च्छ॒न्ति॒ । ई॒म् । अव॑सा । चि॒त्रऽभा॑नवः । काम॑म् । विप्र॑स्य । त॒र्प॒य॒न्त॒ । धाम॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
जिह्मं नुनुद्रेऽवतं तया दिशासिञ्चन्नुत्सं गोतमाय तृष्णजे। आ गच्छन्तीमवसा चित्रभानवः कामं विप्रस्य तर्पयन्त धामभिः ॥

जिह्मम्। नुनुद्रे। अवतम्। तया। दिशा। असिञ्चन्। उत्सम्। गोतमाय। तृष्णऽजे। आ। गच्छन्ति। ईम्। अवसा। चित्रऽभानवः। कामम्। विप्रस्य। तर्पयन्त। धामऽभिः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 10 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे दाता लोग (अवतम्) निम्नदेशस्थ (जिह्मम्) कुटिल (कुत्सम्) कूप को खोद के (तृष्णजे) तृषायुक्त (गोतमाय) बुद्धिमान् पुरुष को (ईम्) जल से (असिञ्चन्) तृप्त करके (तया) (दिशा) उस अभीष्ट दिशा से (नुनुद्रे) उसकी तृषा को दूर कर देते हैं, जैसे (चित्रभानवः) विविध प्रकाश के आधार प्राणों के समान (धामभिः) जन्म, नाम और स्थानों से (विप्रस्य) विद्वान् के (अवसा) रक्षण से (कामम्) कामना को (तर्पयन्त) पूर्ण करते और सब ओर से सुख को (आगच्छन्ति) प्राप्त होते हैं, वैसे उत्तम मनुष्यों को होना चाहिये ॥ ११ ॥
Essence
जैसे मनुष्य कूप को खोद खेत वा बगीचे आदि को सींचके उसमें उत्पन्न हुए अन्न और फलादि से प्राणियों को तृप्त करके सुखी करते हैं, वैसे ही सभाध्यक्ष आदि लोग वेदशास्त्रों में विशारद विद्वानों को कामों से पूर्ण करके इनसे विद्या, उत्तम शिक्षा और धर्म का प्रचार कराके सब प्राणियों को आनन्दित करें ॥ ११ ॥
Subject
फिर वे किसके लिये क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥