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Rigveda Mandal 1 / Sukta 84 / Mantra 8

191 Sukta
20 Mantra
1/84/8
Devata- इन्द्र: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत्। क॒दा नः॑ शुश्रव॒द्गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥

क॒दा । मर्त॑म् । अ॒रा॒धस॑म् । प॒दा । क्षुम्प॑म्ऽइव । स्फु॒र॒त् । क॒दा । नः॒ । शु॒श्र॒व॒त् । गिरः॑ । इन्द्रः॑ । अ॒ङ्ग ॥

Mantra without Swara
कदा मर्तमराधसं पदा क्षुम्पमिव स्फुरत्। कदा नः शुश्रवद्गिर इन्द्रो अङ्ग ॥

कदा। मर्तम्। अराधसम्। पदा। क्षुम्पम्ऽइव। स्फुरत्। कदा। नः। शुश्रवत्। गिरः। इन्द्रः। अङ्ग ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 6 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(अङ्ग) शीघ्रकर्त्ता (इन्द्रः) सभा आदि का अध्यक्ष (पदा) विज्ञान वा धन की प्राप्ति से (क्षुम्पमिव) जैसे सर्प्प फण को (स्फुरत्) चलाता है, वैसे (अराधसम्) धनरहित (मर्त्तम्) मनुष्य को (कदा) किस काल में चलावोगे (कदा) किस काल में (नः) हमको उक्त प्रकार से अर्थात् विज्ञान वा धन की प्राप्ति से जैसे सर्प्प फण को चलाता है, वैसे (गिरः) वाणियों को (शुश्रवत्) सुन कर सुनावोगे ॥ ८ ॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम लोग में से जो दरिद्रों को भी धनयुक्त, आलसियों को पुरुषार्थी और श्रवणरहितों को श्रवणयुक्त करे, उस पुरुष ही को सभा आदि का अध्यक्ष करो। कब यहाँ हमारी बात को सुनोगे और हम कब आपकी बात को सुनेंगे, ऐसी आशा हम करते हैं ॥ ८ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥