Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 84 / Mantra 17

191 Sukta
20 Mantra
1/84/17
Devata- इन्द्र: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
क ई॑षते तु॒ज्यते॒ को बि॑भाय॒ को मं॑सते॒ सन्त॒मिन्द्रं॒ को अन्ति॑। कस्तो॒काय॒ क इभा॑यो॒त रा॒येऽधि॑ ब्रवत्त॒न्वे॒३॒॑ को जना॑य ॥

कः । ई॒ष॒ते॒ । तु॒ज्यते॑ । कः । बि॒भा॒य॒ । कः । मं॒स॒ते॒ । सन्त॑म् । इन्द्र॑म् । कः । अन्ति॑ । कः । तो॒काय॑ । कः । इभा॑य । उ॒त । रा॒ये । अधि॑ । ब्र॒व॒त् । त॒न्वे॑ । कः । जना॑य ॥

Mantra without Swara
क ईषते तुज्यते को बिभाय को मंसते सन्तमिन्द्रं को अन्ति। कस्तोकाय क इभायोत रायेऽधि ब्रवत्तन्वे३ को जनाय ॥

कः। ईषते। तुज्यते। कः। बिभाय। कः। मंसते। सन्तम्। इन्द्रम्। कः। अन्ति। कः। तोकाय। कः। इभाय। उत। राये। अधि। ब्रवत्। तन्वे। कः। जनाय ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे सेनापते ! सेनाओं में स्थित भृत्यों में (कः) कौन शत्रुओं को (ईषते) मारता है। (कः) कौन शत्रुओं से (तुज्यते) मारा जाता है (कः) कौन युद्ध में (बिभाय) भय को प्राप्त होता है (कः) कौन (सन्तम्) राजधर्म में वर्त्तमान (इन्द्रम्) उत्तम ऐश्वर्य के दाता को (मंसते) जानता है (कः) कौन (तोकाय) सन्तानों के (अन्ति) समीप में रहता है (कः) कौन (इभाय) हाथी के उत्तम होने के लिये शिक्षा करता है (उत) और (कः) कौन (राये) बहुत धन करने के लिये वर्तता है? और कौन (तन्वे) शरीर और (जनाय) मनुष्यों के लिये (अधिब्रवत्) आज्ञा देता है? इसका उत्तर आप दीजिये ॥ १७ ॥
Essence
जो अड़तालीस वर्ष पर्यन्त ब्रह्मचर्य, उत्तम शिक्षा और अन्य शुभ गुणों से युक्त होते हैं, वे विजयादि कर्मों को कर सकते हैं। जैसे राजा सेनापति को सब अपनी सेना के नौकरों की व्यवस्था को पूछे, वैसे सेनापति भी अपने अधीन छोटे सेनापतियों को स्वयं सब वार्त्ता पूछे। जैसे राजा सेनापति को आज्ञा देवे, वैसे (सेनापति स्वयं) सेना के प्रधान पुरुषों को करने योग्य कर्म की आज्ञा देवे ॥ १७ ॥
Subject
अब अगले मन्त्र में प्रश्नोत्तर से राजधर्म का उपदेश किया है ॥