Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 79 / Mantra 8

191 Sukta
12 Mantra
1/79/8
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ नो॑ अग्ने र॒यिं भ॑र सत्रा॒साहं॒ वरे॑ण्यम्। विश्वा॑सु पृ॒त्सु दु॒ष्टर॑म् ॥

आ । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । र॒यिम् । भ॒र॒ । स॒त्रा॒ऽसह॑म् । वरे॑ण्यम् । विश्वा॑सु । पृ॒त्ऽसु । दु॒स्तर॑म् ॥

Mantra without Swara
आ नो अग्ने रयिं भर सत्रासाहं वरेण्यम्। विश्वासु पृत्सु दुष्टरम् ॥

आ। नः। अग्ने। रयिम्। भर। सत्राऽसाहम्। वरेण्यम्। विश्वासु। पृत्ऽसु। दुस्तरम् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) दान देने वा दिलानेवाले सभाध्यक्ष ! आप (नः) हम लोगों के लिये (विश्वासु) सब (पृत्सु) सेनाओं में (सत्रासाहम्) सत्य का सहन करते हैं जिससे उस (वरेण्यम्) अच्छे गुण और स्वभाव होने का हेतु (दुष्टरम्) शत्रुओं के दुःख से तरने योग्य (रयिम्) अच्छे द्रव्यसमूह को (आभर) अच्छी प्रकार धारण कीजिये ॥ ८ ॥
Essence
मनुष्यों को सभाध्यक्ष आदि के आश्रय और अग्न्यादि पदार्थों के विज्ञान के विना सम्पूर्ण सुख प्राप्त कभी नहीं हो सकता ॥ ८ ॥
Subject
फिर वह सभाध्यक्ष कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥