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Rigveda Mandal 1 / Sukta 79 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/79/7
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अवा॑ नो अग्न ऊ॒तिभि॑र्गाय॒त्रस्य॒ प्रभ॑र्मणि। विश्वा॑सु धी॒षु व॑न्द्य ॥

अव॑ । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । ऊ॒तिऽभिः॑ । गा॒य॒त्रस्य॑ । प्रऽभ॑र्मणि । विश्वा॑सु । धी॒षु । व॒न्द्य॒ ॥

Mantra without Swara
अवा नो अग्न ऊतिभिर्गायत्रस्य प्रभर्मणि। विश्वासु धीषु वन्द्य ॥

अव। नः। अग्ने। ऊतिऽभिः। गायत्रस्य। प्रऽभर्मणि। विश्वासु। धीषु। वन्द्य ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे (वन्द्य) अभिवादन और प्रशंसा करने योग्य (अग्ने) विज्ञानस्वरूप सभाध्यक्ष ! आप (ऊतीभिः) रक्षण आदि से (गायत्रस्य) गायत्री के प्रगाथ वा आनन्दकारक व्यवहार का (प्रभर्मणि) अच्छी प्रकार राज्यादि का धारण हो जिसमें उस तथा (विश्वासु) सब (प्रज्ञासु) बुद्धियों में (नः) हम लोगों की (अव) रक्षा कीजिये ॥ ७ ॥
Essence
सब मनुष्यों को चाहिये कि जो सभाध्यक्ष विद्वान् हमारी बुद्धि को शुद्ध करता है, उसका सत्कार करें ॥ ७ ॥
Subject
फिर वह सभाध्यक्ष कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

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