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Rigveda Mandal 1 / Sukta 79 / Mantra 4

191 Sukta
12 Mantra
1/79/4
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- आर्ष्युष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अग्ने॒ वाज॑स्य॒ गोम॑त॒ ईशा॑नः सहसो यहो। अ॒स्मे धे॑हि जातवेदो॒ महि॒ श्रवः॑ ॥

अग्ने॑ । वाज॑स्य । गोम॑तः । ईशा॑नः । स॒ह॒सः॒ । य॒हो॒ इति॑ । अ॒स्मे इति॑ । धे॒हि॒ । जा॒त॒ऽवे॒दः॒ । महि॑ । श्रवः॑ ॥

Mantra without Swara
अग्ने वाजस्य गोमत ईशानः सहसो यहो। अस्मे धेहि जातवेदो महि श्रवः ॥

अग्ने। वाजस्य। गोमतः। ईशानः। सहसः। यहो इति। अस्मे इति। धेहि। जातऽवेदः। महि। श्रवः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 27 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (जातवेदः) प्राप्तविज्ञान (अग्ने) विद्युत् के समान विद्या प्रकाशयुक्त विद्वन् ! (सहसः) बलयुक्त पुरुष के (यहो) पुत्र (गोतमः) धन से युक्त (वाजस्य) अन्न के (ईशानः) स्वामी आप (अस्मे) हम लोगों में (महि) बड़े (श्रवः) विद्याश्रवण को (धेहि) धारण कीजिये ॥ ४ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो मनुष्य विद्वान् माता और पिताओं के सन्तान होके माता, पिता और आचार्य्य से विद्या की शिक्षा को प्राप्त होकर बहुत अन्नादि ऐश्वर्य और विद्याओं को प्राप्त हों, वे अन्य मनुष्यों में भी यह सब बढ़ावें ॥ ४ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥