Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 79 / Mantra 2

191 Sukta
12 Mantra
1/79/2
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ ते॑ सुप॒र्णा अ॑मिनन्तँ॒ एवैः॑ कृ॒ष्णो नो॑नाव वृष॒भो यदी॒दम्। शि॒वाभि॒र्न स्मय॑मानाभि॒रागा॒त्पत॑न्ति॒ मिहः॑ स्त॒नय॑न्त्य॒भ्रा ॥

आ । ते॒ । सु॒ऽप॒र्णाः । अ॒मि॒न॒न्त॒ । एवैः॑ । कृ॒ष्णः । नो॒ना॒व॒ । वृ॒ष॒भः । यदि॑ । इ॒दम् । शि॒वाभिः॑ । न । स्मय॑मानाभिः । आ । अ॒गा॒त् । पत॑न्ति । मिहः॑ । स्त॒नय॑न्ति । अ॒भ्रा ॥

Mantra without Swara
आ ते सुपर्णा अमिनन्तँ एवैः कृष्णो नोनाव वृषभो यदीदम्। शिवाभिर्न स्मयमानाभिरागात्पतन्ति मिहः स्तनयन्त्यभ्रा ॥

आ। ते। सुऽपर्णाः। अमिनन्त। एवैः। कृष्णः। नोनाव। वृषभः। यदि। इदम्। शिवाभिः। न। स्मयमानाभिः। आ। अगात्। पतन्ति। मिहः। स्तनयन्ति। अभ्रा ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 27 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! आप जैसे (सुपर्णाः) किरणें (आमिनन्त) सब ओर से वर्षा की प्रेरणा करती हैं (एवैः) प्राप्त करनेवाले गुणों से सहित (कृष्णः) आकर्षण करता (वृषभः) वर्षानेवाला सूर्य (इदम्) जल को वर्षाता है, वैसे विद्या की (नोनाव) प्रशंसित वृष्टि करें तथा (स्मयमानाभिः) सदा प्रसन्नवदन (शिवाभिः) शुभ गुण, कर्म्मयुक्त कन्याओं के साथ तत्तुल्य ब्रह्मचारियों के विवाह के (न) समान सुख को (यदि) जो (अगात्) प्राप्त हो और जैसे (अभ्रा) मेघ (स्तनयन्ति) गर्जते तथा (मिहः) वर्षा के जल (आ पतन्ति) वर्षते हैं, वैसे विद्या को वर्षावे तो (ते) तुझको क्या अप्राप्त हो, अर्थात् सब सुख प्राप्त हों ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार और उपमालङ्कार हैं। जिन विद्वान् ब्रह्मचारियों की विदुषी ब्रह्मचारिणी स्त्री हों, वे पूर्ण सुख को क्यों न प्राप्त हों ॥ २ ॥
Subject
फिर वह विद्वान् कैसा हो, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥